बैतूल , अप्रैल 17 -- शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य बनाए जाने के मुद्दे पर प्रदेश में चल रहे विरोध के बीच बैतूल में एक ज्ञापन की चूक ने नई बहस को जन्म दे दिया है। इस घटना के बाद शिक्षकों की योग्यता और शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार लोक शिक्षण संचालनालय और जनजातीय कार्य विभाग के आदेश के विरोध में शिक्षक संगठनों द्वारा ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। इसी क्रम में बैतूल में अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा द्वारा एक ज्ञापन दिया गया, जिसमें एक गंभीर त्रुटि सामने आई।
ज्ञापन में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को "मध्यप्रदेश शासन भोपाल का प्रदेश अध्यक्ष" संबोधित कर दिया गया, जिससे राजनीतिक संगठन और शासन के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े हो गए। इस ज्ञापन पर कई शिक्षकों के हस्ताक्षर भी हैं, जिससे इसे सामूहिक चूक माना जा रहा है।
इस घटना के बाद विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे विद्यार्थियों के बौद्धिक और सामाजिक विकास के मार्गदर्शक होते हैं। ऐसे में उनकी बुनियादी समझ और सामान्य ज्ञान का स्तर अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उधर, टीईटी की अनिवार्यता का विरोध कर रहे शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को दोबारा परीक्षा में बैठाना अनुचित है। वहीं सरकार इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका पर विचार कर रही है।
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