बैतूल , अप्रैल 29 -- मध्यप्रदेश के बैतूल कृषि उपज मंडी में अव्यवस्था और समन्वय की कमी के चलते किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हमालों के सामूहिक अवकाश के कारण मंडी में तुलाई कार्य पूरी तरह ठप हो गया, जबकि मंडी बंद किए जाने की समुचित सूचना किसानों तक नहीं पहुंच सकी।

मंडी सूत्रों के अनुसार करीब डेढ़ हजार हमालों ने विवाह समारोहों के चलते अवकाश ले लिया, जिससे उपज की तुलाई संभव नहीं हो सकी। इस स्थिति में मंडी प्रबंधन ने बंदी का निर्णय लिया, लेकिन इस निर्णय को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही सामने आई है।

भारसाधक अधिकारी एवं एसडीएम अभिजीत सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्हें मंडी बंद करने की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि नियमानुसार अवकाश घोषित करने के लिए उनकी अनुमति आवश्यक होती है, जिसका पालन नहीं किया गया।

वहीं मंडी प्रबंधन का कहना है कि बंदी की सूचना एक दिन पहले उद्घोषणा और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से दी गई थी, लेकिन यह व्यवस्था दूरदराज के किसानों तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच सकी। परिणामस्वरूप कई किसान अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचे, जहां तुलाई न होने से उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा।

इस समय गेहूं और मक्का की आवक चरम पर है, ऐसे में मंडी बंद रहने से खरीदी प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। साथ ही पंजीकृत लाइसेंसी खरीदारों की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है। जानकारी के अनुसार मंडी में केवल कुछ ही खरीदार सक्रिय हैं, जबकि अन्य लाइसेंसधारी निष्क्रिय बने हुए हैं।

किसान नेता रमेश गायकवाड़ ने कहा कि छुट्टी की जानकारी समय पर नहीं मिलने से किसानों में भ्रम की स्थिति बनी और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने प्रशासन से व्यवस्था सुधारने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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