बैतूल , जुलाई 20 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में 248 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित बैतूल-सारणी-परासिया स्टेट हाईवे-43 के रखरखाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं। 15 वर्ष तक सड़क का रखरखाव करने की संविदात्मक जिम्मेदारी होने के बावजूद निर्माण के 11वें वर्ष में ही कई स्थानों पर सड़क और जल निकासी व्यवस्था बदहाल हो गई है। बारिश के दौरान और उसके बाद सड़क पर जलभराव की स्थिति बनने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।

जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) ने वर्ष 2014 में लगभग 248 करोड़ रुपये की लागत से 124 किलोमीटर लंबे बैतूल-सारणी-परासिया स्टेट हाईवे-43 के निर्माण का कार्य शुरू कराया था। सड़क का निर्माण वर्ष 2016 में पूरा हुआ था। निर्माण कार्य दिलीप बिल्डकॉन कंपनी द्वारा किया गया था। अनुबंध के अनुसार कंपनी को वर्ष 2030 तक सड़क का रखरखाव और आवश्यक मरम्मत कार्य करना है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हाईवे के दोनों ओर बनाई गई नालियां कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिससे जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हो गई है। गोठाना सहित अनेक स्थानों पर बारिश का पानी सड़क पर जमा हो जाता है। पहाड़ी क्षेत्रों से लगातार रिसने वाला पानी सड़क पर बहने के कारण मार्ग फिसलन भरा बना रहता है। कई स्थानों पर नालियां टूट जाने से वर्षा का पानी बरसाती नाले की तरह सड़क पर बहता है और बारिश रुकने के बाद भी लंबे समय तक जलभराव बना रहता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर जमा पानी और फिसलन के कारण सबसे अधिक खतरा दोपहिया वाहन चालकों को रहता है। हमलापुर क्षेत्र में पूर्व में भी जलभराव और फिसलन के कारण सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की जान जा चुकी है। उनका कहना है कि समय रहते सुधार कार्य नहीं किए गए तो भविष्य में गंभीर हादसे हो सकते हैं।

क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि जिन स्थानों पर पहाड़ियों से लगातार पानी का रिसाव होता है, वहां अतिरिक्त जल निकासी संरचनाएं विकसित करने की आवश्यकता है। उनके अनुसार केवल नालियों की मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि स्थायी समाधान के लिए नए ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण भी जरूरी है।

सूत्रों के अनुसार एमपीआरडीसी ने निर्माण अनुबंध के दौरान कंपनी से अमानत राशि भी जमा करवाई थी, ताकि निर्धारित अवधि तक सड़क का नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जा सके। इसके बावजूद कई स्थानों पर रखरखाव और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं कमजोर पड़ती दिखाई दे रही हैं।

इस संबंध में एमपीआरडीसी के उप संभागीय अधिकारी (एसडीओ) राजकुमार नागले ने बताया कि सड़क पर जल निकासी की समस्या दूर करने के लिए आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित स्थानों पर सुधार कार्य कराया जा रहा है, ताकि सड़क पर पानी जमा होने की समस्या का स्थायी समाधान किया जा सके।

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