बैतूल , अक्टूबर 29 -- मध्यप्रदेश में बैतूल जिले की आमला तहसील के ग्राम छिपन्या पिपरिया और गोलढाना में करीब 200 एकड़ शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। राजस्व विभाग की ओर से बेदखली की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बीच शिकायतकर्ता खेमू यादव का नाम भी बेदखली सूची में शामिल होने से विवाद गहरा गया है।

जानकारी के अनुसार, खेमू यादव ने 17 जून 2025 को एसडीएम की जनसुनवाई में शासकीय भूमि से अवैध कब्जे हटाने की शिकायत की थी। इसके बाद तहसीलदार न्यायालय में प्रकरण दर्ज किया गया। अतिक्रमण हटाने के लिए 15 अक्टूबर 2026 को आठ सदस्यीय राजस्व दल गठित किया गया, लेकिन बेदखली के लिए तैयार सूची में शिकायतकर्ता का नाम भी शामिल पाया गया।

इस मामले में भाजपा के पूर्व पदाधिकारी विक्रम सिंह परमार का नाम आने पर भी आपत्ति जताई गई है। परमार पक्ष का दावा है कि छिपन्या पिपरिया और गोलढाना की कुछ खसरा नंबर वाली जमीनों के संबंध में उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त है। उनका आरोप है कि इसके बावजूद उनका नाम विवाद से जोड़कर उनकी राजनीतिक और सामाजिक छवि प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने शासकीय भूमि से बड़े पैमाने पर मुरम निकालने, अवैध ईंट निर्माण और परिवहन जैसी गतिविधियां संचालित होने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि स्थानीय प्रशासन को जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। वाहन उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर कार्रवाई टाले जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।

ग्रामीणों ने शासन और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, भूमि का सीमांकन कर वास्तविक अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा न्यायालय के स्थगन आदेशों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।

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