बैतूल , अक्टूबर 18 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के आमला क्षेत्र के छावल गांव की पहाड़ी पर स्थित प्राचीन माता रेणुका देवी धाम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। लगभग पांच सौ वर्ष पुराने इस मंदिर में माता के दिन में तीन बार स्वरूप बदलने की मान्यता श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित यह स्थल धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में भी पहचान बना रहा है।

मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित गणेश गिरी गोस्वामी के अनुसार, यहां स्थापित प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है। मान्यता है कि एक ऋषि को स्वप्न में माता के प्राकट्य का संकेत मिला था, जिसके बाद यहां पूजा-अर्चना शुरू हुई। मंदिर के आसपास खुदाई के दौरान प्राचीन अवशेष और मूर्तियां मिलने की बात भी कही जाती है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सुबह, दोपहर और शाम को माता के अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन होते हैं। भगवान परशुराम की माता और महर्षि जमदग्नि की पत्नी रेणुका देवी से जुड़ी पौराणिक कथाएं भी इस धाम की धार्मिक महत्ता से जुड़ी हैं।

शारदीय और चैत्र नवरात्र में यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है और बैतूल, आमला, छिंदवाड़ा तथा नागपुर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पहाड़ी और हरियाली से घिरा यह मंदिर क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को भी बढ़ा रहा है।

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