टिहरी , अगस्त, 20 -- उत्तराखंड में टिहरी जिला सलाहकार समिति एवं जिला स्तरीय समीक्षा समिति की गुरुवार को बैठक में जिले में संचालित विभिन्न बैंकिंग एवं वित्तीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उन्होंने बैंकों एवं संबंधित विभागों को योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने और निर्धारित लक्ष्यों को समय से पूरा करने के निर्देश दिए।

बैठक में एलडीएम मनीष मिश्रा ने बैंकिंग योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। बताया गया कि आरबीआई के निर्देशों के तहत जिले के टीयर-6 सेंटरों को बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ने के लिए 146 बैंक शाखाओं, 239 पोस्ट पेमेंट बैंक तथा 170 बीसी/सीएसपी के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। वहीं, वित्तीय साक्षरता एवं डिजिटल वित्तीय शिक्षा के तहत जून माह में जिलेभर में 302 कैंप आयोजित किए गए।

सीडीओ ने वित्तीय साक्षरता शिविरों में अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अपेक्षाकृत कम प्रगति वाले बैंकों, जिसमें उत्तराखंड ग्रामीण बैंक भी शामिल है, को कार्य में तेजी लाने को कहा। साथ ही डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने और ग्राहकों को ऑनलाइन लेन-देन, भीम ऐप तथा डिजिटल सेवाओं के लाभों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की समीक्षा के दौरान बैंकों ने डॉक्यूमेंट पेंडेंसी और अंडर-प्रोसेस आवेदनों की स्थिति प्रस्तुत की। सीडीओ ने सभी बैंकों को निर्धारित लक्ष्य अंतिम तिमाही से पहले पूरा करने के प्रयास करने को कहा। जिन खातों में सब्सिडी की धनराशि प्राप्त नहीं हुई है, उनकी शाखावार सूची संबंधित विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के तहत उद्यान विभाग को सितंबर के अंत तक कम से कम 25 आवेदन बैंकों को उपलब्ध कराने को कहा गया। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के तहत भी अधिक से अधिक आवेदन बैंकों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए। किसान क्रेडिट कार्ड योजना में बैंकों द्वारा डिसक्वालिफाई और रिजेक्ट किए गए आवेदनों की जांच कर उचित कारण सहित सूचना उपलब्ध कराने को कहा गया।

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में खातों की संख्या में करीब एक लाख की कमी सामने आने पर सीडीओ ने गंभीरता से समीक्षा की। उन्होंने संबंधित खातों की जांच करने और अधिकारियों को गांवों में जाकर लाभार्थियों से संपर्क करने के निर्देश दिए। अधिकारियों से यह भी पता लगाने को कहा गया कि बीमा की किश्त जमा हुई है या नहीं और योजनाओं में कमी के वास्तविक कारण क्या हैं।

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