बेलगावी , जुलाई 01 -- कर्नाटक के बेलगावी में आयोजित 10-12 जुलाई तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की वार्षिक 'अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक' में संघ का शीर्ष नेतृत्व और देशभर के वरिष्ठ संचालक जुटेंगे, जो आगामी जनगणना और संगठन विस्तार की रणनीति पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
आरएसएस के बुधवार को जारी बयान के अनुसार, इस तीन दिवसीय बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान किये गये शाखाओं के विस्तार की समीक्षा करने और देश भर में जमीनी स्तर पर अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने की योजनाओं को अंतिम रूप देने पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा।
बैठक में जनगणना सहित महत्वपूर्ण समसामयिक मुद्दों पर भी चर्चा होगी, जिसमें प्रचारक देश के विभिन्न हिस्सों से अपने अनुभव साझा करेंगे। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह मार्च में समालखा में हुई 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' की बैठक के बाद अप्रैल-जून के बीच देश भर में आयोजित संघ के प्रशिक्षण शिविरों के पूरा होने के बाद हो रही है।
बैठक में शामिल होने वाले प्रतिनिधि शाखा स्तर पर संगठनात्मक योजनाओं के अमल का आकलन करेंगे और विस्तार के अगले चरण की रूपरेखा तैयार करेंगे।
आरएसएस अपने 2026 के प्रशिक्षण शिविरों के परिणामों की समीक्षा करेगा, शताब्दी वर्ष समारोहों के तहत आयोजित कार्यक्रमों का मूल्यांकन करेगा और शेष शताब्दी कार्यक्रमों के लिए खाका बनायेगा, जो इस वर्ष 20 अक्टूबर को मनाये जाने वाले विजयादशमी तक जारी रहेंगे।
बैठक में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के वर्ष 2026-27 के राष्ट्रव्यापी दौरे के कार्यक्रम पर भी चर्चा की जायेगी।
बैठक में शामिल होने वाले वरिष्ठ पदाधिकारियों में आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, सीआर मुकुंद, अरुण कुमार, रामदत्त, आलोक कुमार और अतुल लिमये के साथ-साथ अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य और संघ से प्रेरित 32 संगठनों के संगठन मंत्री शामिल हैं।
इस वार्षिक रणनीतिक बैठक में संघ के सभी 11 संगठनात्मक क्षेत्रों और 46 प्रांतों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। डॉ. भागवत इस बैठक से पहले ही छह जुलाई को बेलगावी पहुंचने वाले हैं।
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