लखनऊ , मार्च 21 -- उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को हुई बेमौसम बारिश, तेज हवाओं और दिनभर छाए बादलों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर गेहूं, सरसों और आलू जैसी रबी फसलें, जो कटाई के अंतिम चरण में हैं, उन्हें भारी नुकसान का खतरा मंडरा रहा है।
राज्य के कई जिलों में रुक-रुक कर हुई बारिश और तेज हवाओं ने कटाई कार्य को बाधित कर दिया है। खेतों में खड़ी फसलें गिरने लगी हैं, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ने की आशंका है। पक कर तैयार गेंहूं तेज हवाओं के कारण कई जगहों पर खेतों में ही बिछ गया है। वहीं सरसों की फसल में नमी बढ़ने से फलियां फटने और फफूंद लगने का खतरा बढ़ गया है। आलू की फसल के लिए भी जलभराव बड़ी समस्या बन सकता है, जिससे सड़न का खतरा है।
देश में गेहूं उत्पादन में अग्रणी उत्तर प्रदेश लगभग 32 प्रतिशत योगदान देता है। प्रदेश में करीब 129 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलें बोई जाती हैं, जिनमें गेहूं का सबसे बड़ा हिस्सा है। वर्ष 2025 में प्रदेश का गेहूं उत्पादन लगभग 441 लाख मीट्रिक टन रहा था।
प्रमुख सचिव कृषि रविंद्र कुमार ने कहा कि अगर बारिश जारी रही तो तैयार फसलों को नुकसान हो सकता है। इसका आकलन किया जा रहा है।
प्रयागराज में किसानों ने बताया कि तेज हवाओं से गेहूं की फसल गिर गई है, जिससे पैदावार और दाने की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। मटर और सरसों की फसलें भी प्रभावित हुई हैं, जबकि खेतों में पानी भरने से आलू के सड़ने की आशंका बढ़ गई है। ट्रांस-यमुना क्षेत्र, खासकर मांडा इलाके में बिजली और तेज हवाओं के चलते किसान सुबह से ही खेतों की ओर दौड़ पड़े।
किसानों का कहना है कि फसल चक्र के दौरान सिंचाई की कमी रहती है, लेकिन जब फसल तैयार होती है तब बारिश आकर सारी मेहनत पर पानी फेर देती है। लगातार बारिश होने पर खेतों में पड़े आलू खराब हो सकते हैं, जिससे किसानों को औने-पौने दाम पर बिक्री के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है और किसानों को जल्द से जल्द कटाई पूरी कर सुरक्षित भंडारण करने की सलाह दी है। कृषि निदेशक पंकज त्रिपाठी ने बताया कि पश्चिमी, पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश के जिलों में अधिक असर पड़ा है और नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे कराया जाएगा, जिसके बाद बीमित किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।
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