नाहन , जून 14 -- हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के पछात क्षेत्र में बेमौसम बारिश, तेज हवाओं और भीषण ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई है। शुक्रवार शाम और शनिवार को बदले मौसम के मिजाज के कारण कई गांवों में खेतों में खड़ी टमाटर और शिमला मिर्च की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। प्रभावित किसानों का दावा है कि इस प्राकृतिक आपदा के कारण उन्हें करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।

इस भयंकर तूफान और ओलावृष्टि से पछात क्षेत्र के सिरमौरी मंदिर, ढींगरी सरजेट, भैलन, ढींगरी ढीनी, मढ़ीघाट, जयहर, शादिया, शौती, मसारिया और नारग सहित कई इलाकों में फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। कई जगहों पर पौधों की टहनियां टूट गईं, जबकि पकने की कगार पर खड़ी फसलें जमीन पर गिरकर खराब हो गई हैं। किसानों का कहना है कि उनकी तीन से चार महीने की कड़ी मेहनत कुछ ही घंटों में मिट्टी में मिल गई। जिस फसल से वे साल भर की कमाई की उम्मीद लगाए बैठे थे, वह अब बर्बादी की कगार पर है। क्षेत्र के किसानों ने बताया कि एक सीजन में टमाटर और शिमला मिर्च की खेती पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन पैदावार शुरू होने से पहले ही फसलों को यह तगड़ा झटका लगा है।

ढींगरी सरजेट के प्रताप सिंह, जितेंद्र ठाकुर और योगेंद्र सिंह, ढींगरी ढीनी के कुलदीप ठाकुर, शौती के हितेंद्र सिंह और वीरेंद्र सिंह तथा शादिया के नरदेव ठाकुर सहित कई किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि प्रभावित खेतों का तुरंत सर्वेक्षण (सर्वे) करवाकर नुकसान का आकलन किया जाए और पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।

मौसम की इस मार से न केवल सब्जियों की फसलें, बल्कि पछात के बागवान भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। क्षेत्र में आलू बुखारा, खुबानी,आड़ू और कीवी की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचने की खबर है। बागवानी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का दायरा बड़ा साबित होता है, तो इसका सीधा असर स्थानीय बाजारों और मंडियों में फलों और सब्जियों की आवक और कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित