बेमेतरा, 28 फरवरी 2026 ( वार्ता ) छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलों में रंगों का पर्व होली इस वर्ष भी पूरे हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा । शहर से लेकर गांव तक उत्साह का माहौल अभी से है और हर ओर रंग, गुलाल और खुशियों की बौछार देखने को मिल रही है।
होली का उल्लेख वैदिक काल से मिलता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत, प्रेम, भाईचारे और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार असुर राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने के लिए अनेक प्रयास किए। कहा जाता है कि हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था। वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन अहंकार और अधर्म के कारण होलिका जलकर भस्म हो गई, जबकि सच्ची भक्ति के प्रतीक प्रह्लाद सुरक्षित बाहर आ गए। यह घटना बुराई के अंत और सत्य की विजय का संदेश देती है। इसी के प्रतीक स्वरूप प्रतिवर्ष होलिका दहन किया जाता है।
यदि जिले की बात करें तो बाजारों में रंग-गुलाल, पिचकारी और मिठाइयों की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है। दुकानदारों के चेहरों पर रौनक साफ दिखाई दे रही है और व्यापार में भी अच्छी तेजी आई है।
शहर से लेकर गांव तक ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई देने लगी है। युवा वर्ग रंगों की खरीदारी में जुटा है, वहीं बच्चे नई-नई पिचकारियों को लेकर खासे उत्साहित नजर आ रहे हैं। मिठाई दुकानों में गुजिया, मालपुआ और अन्य पारंपरिक व्यंजनों की तैयारियां जोरों पर हैं।
प्रशासन की ओर से भी शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में त्योहार मनाने की अपील की गई है।
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