बैतूल , मई 02 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले से एक भावुक और समाज को नई दिशा देने वाली घटना सामने आई है, जहां बेटियों ने पारंपरिक मान्यताओं को पीछे छोड़ते हुए अपने पिता का अंतिम संस्कार स्वयं कर समाज में समानता और सशक्तिकरण का संदेश दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गौठाना निवासी (मूल निवासी पारबिरोली) 81 वर्षीय भीमराव भोसले का कल रात निधन हो गया। उनके निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। शुक्रवार को उनके निवास से अंतिम यात्रा निकाली गई, जो कोठी बाजार स्थित मोक्षधाम पहुंची।

सामान्यतः हिंदू परंपरा में अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी पुत्रों द्वारा निभाई जाती है, लेकिन इस अवसर पर भीमराव भोसले की बेटियों ने यह दायित्व संभालकर एक नई मिसाल पेश की। उनकी पुत्रियां शकुंतला, विमल, त्रिवेणी, पुष्पा और सरोज ने पूरे विधि-विधान के साथ अपने पिता को अंतिम विदाई दी।

इस दौरान सबसे बड़ी बेटी शकुंतला ने अपने पिता को मुखाग्नि दी, जबकि सरोज ने चिता की परिक्रमा करते हुए मटका फोड़ने की रस्म निभाई। बेटियों द्वारा निभाई गई इन परंपरागत रस्मों को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं और माहौल अत्यंत भावुक हो उठा।

स्थानीय लोगों ने इस पहल को सामाजिक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उपस्थित जनसमूह ने कहा कि बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि वे किसी भी जिम्मेदारी में बेटों से कम नहीं हैं और परंपराएं समय के साथ बदल सकती हैं।

यह घटना न केवल एक परिवार की भावनात्मक मजबूती को दर्शाती है, बल्कि समाज में व्याप्त लैंगिक भेदभाव को भी चुनौती देती है। बेटियों का यह कदम महिला सशक्तिकरण और समान अधिकारों की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है।

इस मार्मिक घटना ने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि रिश्तों और जिम्मेदारियों का निर्धारण लिंग के आधार पर नहीं, बल्कि भावनाओं और कर्तव्यनिष्ठा से होना चाहिए।

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