अमृतसर , मार्च 20 -- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने 'पंजाब पवित्र धार्मिक ग्रंथ विरुद्ध अपराध रोकथाम विधेयक 2025' के संबंध में शिरोमणि कमेटी द्वारा पंजाब सरकार से मांगी गयी जानकारियां उपलब्ध न करवाने पर सवाल उठाये हैं। एडवोकेट धामी ने कहा कि हालांकि हर धर्म के धार्मिक ग्रंथ सम्माननीय हैं, लेकिन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सिखों के लिए 'जागत जोति' (जीवित गुरु) हैं। गुरबाणी की बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के संबंध में विशेष कानूनी प्रावधान होने चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान कानून के तहत चल रहे बेअदबी के मामलों में भी दोषियों को सख्त सजा सुनिश्चित की जानी चाहिए, न कि इसे केवल एक राजनीतिक मुद्दा बनाकर रखा जाये।

एडवोकेट धामी ने कहा कि पंजाब विधानसभा द्वारा यह विधेयक लाया गया था, लेकिन इस संबंध में सरकार का अब तक का दृष्टिकोण निराशाजनक रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में गठित सिलेक्ट कमेटी ने शिरोमणि कमेटी से सुझाव मांगे थे। इसके जवाब में शिरोमणि कमेटी ने एक 15 सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया था। कमेटी की बैठकों के बाद सिलेक्ट कमेटी से कुछ आवश्यक जानकारियां मांगी गयी थीं, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

एडवोकेट धामी ने स्पष्ट किया कि सिख संस्था शिरोमणि कमेटी अपनी राय और सुझाव रिपोर्ट केवल तभी दे सकती है, जब उसे मांगी गयी जरूरी जानकारियां मिल जाएं, लेकिन सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की महानता एक हाजिर-नाजिर सतगुरु के रूप में है, इसलिए इस विधेयक में इस पक्ष को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कई बार पत्र लिखकर रिकॉर्ड और जानकारी मांगने के बावजूद प्रवर समिति का जानबूझकर जानकारी न देना दुर्भाग्यपूर्ण, पक्षपाती और राजनीतिक हितों से प्रेरित लगता है। इससे साबित होता है कि सुझाव मांगने के लिए जारी किया गया पत्र महज एक दिखावा था।एडवोकेट धामी ने यह भी कहा कि बेअदबी से संबंधित सख्त कानून की मांग को लेकर भाई गुरजीत सिंह द्वारा समाणा में संघर्ष किया जा रहा है, जिसे शिरोमणि कमेटी पहले दिन से पूर्ण समर्थन दे रही है। उन्होंने अंत में कहा कि बेअदबी के मामले पर किसी भी पक्ष को राजनीति नहीं करनी चाहिए, बल्कि इस गंभीर मुद्दे पर एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए।

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