गिद्दड़बाहा/श्री मुक्तसर साहिब , अगस्त 01 -- श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने शनिवार को कहा कि बेअदबी कानून के मुद्दे पर पंजाब सरकार को श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति के साथ बैठकर विचार-विमर्श करना चाहिए और सुझाए गए संशोधनों पर निर्णय लेना चाहिए।

जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में इस संवेदनशील विषय का स्थायी समाधान चाहती है तो उसे किसी प्रकार की राजनीतिक चालाकी से बचना होगा।

मीरी-पीरी खालसा मार्च के दौरान गुरुद्वारा गंगसर साहिब, जैतो से श्री मुक्तसर साहिब की ओर रवाना होने से पहले संगत को संबोधित करते हुए जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से सुझाए गए संशोधनों को स्वीकार करने से एक व्यापक और प्रभावी सम्मान कानून बनेगा तथा समाज में विश्वास और सौहार्द का वातावरण मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि छठे पातशाह श्री गुरु हरगोबिंद साहिब द्वारा दिए गए मीरी-पीरी के सिद्धांत के अनुसार सिख धर्म और राजनीति एक-दूसरे के पूरक हैं। जो लोग धर्म और राजनीति को अलग करने की बात करते हैं, वे सिख सिद्धांतों की सही समझ नहीं रखते। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सिख समाज का धार्मिक के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी सशक्त होना आवश्यक है।

जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि जब-जब सिख समाज गुरबाणी, गुरमत सिद्धांतों और पंथक एकता से दूर हुआ, तब-तब विरोधी ताकतों ने उसकी संस्थाओं पर हमला किया। उन्होंने संगत से गुरु विरोधी और खालसा पंथ विरोधी ताकतों से सतर्क रहने का आह्वान किया। उन्होंने जैतो मोर्चे का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराजा रिपुदमन सिंह को गद्दी से हटाया जाना केवल राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि सिखों की धार्मिक स्वतंत्रता और स्वाभिमान पर हमला था। इस अन्याय के खिलाफ सिख कौम ने शांतिपूर्ण लेकिन अडिग संघर्ष किया और अनेक सिंहों एवं सिंहनियों ने शहादत देकर धर्म और सिद्धांतों की रक्षा का उदाहरण प्रस्तुत किया।

मीरी-पीरी खालसा मार्च के नौवें दिन आज यह यात्रा गुरुद्वारा गंगसर साहिब, जैतो (फरीदकोट) से श्री मुक्तसर साहिब के लिए रवाना हुई। प्रस्थान से पहले आयोजित दीवान में सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब के ग्रंथी ज्ञानी केवल सिंह ने संगत को सिख इतिहास से जोड़ते हुए विचार रखे, जबकि हेड प्रचारक भाई सरबजीत सिंह ढोटियां ने मार्च के उद्देश्य और सिख सिद्धांतों पर प्रकाश डाला।

अरदास के बाद श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पावन स्वरूप पालकी साहिब में सुशोभित किया गया। इस दौरान चौर साहिब की सेवा जत्थेदार गड़गज्ज ने निभाई। पूरे मार्ग में संगतों ने उत्साहपूर्वक खालसा मार्च का स्वागत किया। डेलियांवाली, रोड़ी कपूरा, रामेआणा, मल्लण, गुड़ी संघर, काउणी, दोदा, भुल्लर, बरकंदी तथा श्री मुक्तसर साहिब सहित विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने श्रद्धा के साथ मार्च का अभिनंदन किया।

गिद्दड़बाहा क्षेत्र में पहुंचने पर वरिष्ठ अकाली नेता तजिंदर सिंह मिड्डूखेड़ा, गुरविंदर सिंह, बीबी गुरदयाल कौर मल्लण, एडवोकेट गुरमीत सिंह मान, चरणजीत सिंह भूंदड़ तथा शिरोमणि कमेटी सदस्य नवतेज सिंह काउणी की अगुवाई में युवाओं ने खालसा मार्च का जोरदार स्वागत किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में युवाओं ने पीली दस्तारें पहन रखी थीं।

आज रात्रि पड़ाव श्री मुक्तसर साहिब में होगा, जहां से रविवार को मार्च अपने अगले चरण के लिए रवाना होगा। मार्च के साथ चल रही गुरु साहिबान एवं शहीद सिंहों के शस्त्रों वाली बस तथा शहीदों के चित्रों से सुसज्जित वाहनों ने संगत का विशेष आकर्षण केंद्र बने रहे। मार्च के दौरान युवाओं ने "गुरु विरोधी" और "खालसा पंथ विरोधी" लिखी तख्तियां लहराकर श्री अकाल तख्त साहिब के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

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