अमृतसर , जुलाई 30 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता एवं सिख चिंतक प्रो. सरचांद सिंह ख्याला ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार द्वारा लाया गया बेअदबी कानून बरगाड़ी बेअदबी मामलों के आरोपियों को सजा दिलाने के बजाय जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा सरकार के जवाब को असंतोषजनक बताते हुए खारिज किया जाना मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की नैतिक हार है।

प्रो. ख्याला ने कहा कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी ने बरगाड़ी बेअदबी मामले के आरोपियों को 24 घंटे के भीतर सजा दिलाने का वादा किया था, लेकिन साढ़े चार वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो पीड़ितों को न्याय मिला और न ही दोषियों को सजा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने न्याय प्रक्रिया तेज करने के बजाय उसे लंबा खींचने का काम किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में बेअदबी रोकना चाहती, तो उसकी पहली प्राथमिकता बरगाड़ी मामले के आरोपियों को सजा दिलाना, 2015 के पीड़ितों को न्याय दिलाना और लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करना होता, न कि नया विवादित कानून लाकर धार्मिक भावनाओं को राजनीतिक मुद्दा बनाना।

भाजपा नेता ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब ने स्पष्ट किया है कि सरकार ने उसके उठाये गये अधिकांश आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने संवाद और सहमति की बजाय अपनी बात थोपने की कोशिश की है।

प्रो. ख्याला ने कहा कि 29 जून को श्री अकाल तख्त साहिब में सत्तारूढ़ दल के सिख मंत्रियों और विधायकों ने अरदास के बाद कानून में संशोधन का वचन दिया था, लेकिन अब सरकार उसी सहमति से पीछे हटती दिखाई दे रही है। उन्होंने इसे सिख संगत के साथ विश्वासघात करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की मंशा साफ होती तो जवाब भेजने से पहले श्री अकाल तख्त साहिब, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) और सिख विद्वानों के साथ विचार-विमर्श करती। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि उसके 'गुप्त सलाहकार' कौन हैं, जिनकी राय को धार्मिक संस्थाओं से अधिक महत्व दिया गया।

प्रो. ख्याला ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि कस्टोडियन, यूनिक नंबर, केंद्रीय रजिस्टर और धार्मिक प्रबंधन से जुड़े विवादित प्रावधानों पर सिख संस्थाओं की आपत्तियों को क्यों नहीं माना गया तथा फास्ट ट्रैक अदालतों का प्रावधान कानून में क्यों नहीं जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा देने वाले कानून पर किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन ऐसा कानून श्री अकाल तख्त साहिब, एसजीपीसी, कानूनी विशेषज्ञों और सिख समाज की सर्वसम्मति से बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार के पास अभी भी अवसर है कि वह अकाल तख्त साहिब द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति के साथ संवाद कर सर्वसम्मति से कानून तैयार करे।

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