बेंगलुरु , जुलाई 08 -- उन्नत स्तर की विद्युत मोटर प्रौद्योगिकियों पर काम कर रही बेंगलूर की कंपनी वीमैग लैब्स ने बिजली की मोटर की एक ऐसी प्रौद्योगिकी विकसित की है जिसमें रेयर-अर्थ मैगनेट (चुम्बक) की जरूरत नहीं पड़ती है।
कंपनी की ओर से बुधवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि उसकी रोटेटिंग ट्रांसफार्मर एक्साइटेड सिन्क्रोसन मोटर एवं कंट्रोल ( घूर्णनकारी ट्रांसफार्मर से उत्प्रेरित लयबद्ध बोटर और नियंत्रण) प्रौद्योगिकी से उसकी आभासी लयबद्ध चुम्बकीय क्षेत्र वाली मोटर प्रणाली की संरचना मजबूत होती है। कंपनी के अनुसार उसकी इस नयी प्रौद्योगिकी को पेटेंट मिला है और यह उसके नाम यहां पाचवां पेटेंट है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस प्रौद्योगिकी में समान लयबद्धता के साथ चलने वाले स्थायी चुम्बकों वाली विद्युत मोटरों के विपरीत, एक आभासी लयबद्ध चुम्बकीय प्रणाली हर क्षण पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और नियंत्रित एल्गोरिद्म की मदद से चुंबकीय क्षेत्र (मैग्नेटिक फील्ड) तैयार और नियंत्रित करती है। इससे मोटर ब्रश मुक्त और स्लिप-रिंग-मुक्त सिंक्रोनस मोटर के रूप के रूपय में काम करने को तैयार रहती है।
कंपनी का दावा है कि इस प्रौद्योगिकी वाली उसकी मोटर बिना किसी मैग्नेट के भी स्थायी चुम्बक वाली मोटर के बराबर या उससे बेहतर काम करती है। उसका कहना है कि इस समय वह दोपहिया वाहनों और पैसेंजर कार निर्माताओं के साथ परीक्षण के तौर पर कई परियोजनाओं में जुड़ी है। आगे चलकर कंपनी हल्के वाणिज्यिक वाहन (एलसीवी), भारी वाणिज्यिक वाहन (सीवी) और 200 किलोवाट से 600 किलोवाट क्षमता वाले औद्योगिक मोटरों तक में इसका विस्तार करेगी।
उसका कहना है कि वह रोबोटिक्स, रक्षा और कूलिंग सिस्टम जैसे क्षेत्रों के लिए भी इस तकनीक पर काम कर रही है और इसका लाभ मूल उपकरण बनाने वाली कंपनियों (ओईएम) को लाभ होगा। इससे मोटर की लागत कम होगी और रेयर-अर्थ मैग्नेट की आपूर्ति से जुड़े जोखिम भी समाप्त होंगे, क्योंकि वर्तमान में इन मैग्नेट का अधिकांश हिस्सा चीन से आयात किया जाता है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस नयी प्रौद्योगिकी से 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को मजबूती मिलेगी क्योंकि इससे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रिक मोटर तकनीक का स्वदेशी विकास संभव होगा।
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