बेंगलुरु , अक्टूबर 23 -- कर्नाटक के बेंगलुरु में निर्माणाधीन इमारत में हुए विस्फोट में 'इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस' (आईईडी) के इस्तेमाल की संभावना की जांच की जा रही है।
नेशनल जांच एजेंसी (एनआईए) इस मामले को देख रही है, जबकि जांचकर्ता विस्फोट के स्रोत, इसके निशाने और इसके पीछे के मकसद का पता लगाने में जुटे हैं।
पुलाकेशीनगर के जेरेमिया रोड पर स्थित एक इमारत की चौथी मंजिल पर गत 20 अक्टूबर को हुए विस्फोट में दो लोग, असम का एक निर्माण मजदूर अलाउद्दीन और उत्तर प्रदेश का एक सुरक्षा गार्ड सूरज घायल हो गये थे।
इस विस्फोट के बाद गहन जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस कई पहलुओं पर काम कर रही है और विस्फोट में इस्तेमाल की गई सामग्री का पता लगाने के लिए फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
मामले को सुलझाने के लिए पुलिस की पांच विशेष टीमें तैनात की गयी हैं। जांचकर्ताओं ने 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली है, ताकि लोगों की आवाजाही का पता लगाया जा सके और यह पहचाना जा सके कि संदिग्ध विस्फोटक सामग्री वहां कौन लाया था। जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि क्या सुरक्षा गार्ड ही असली निशाना था, या इसके पीछे कोई पुरानी निजी दुश्मनी है। जांचकर्ता इमारत से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रहे हैं और घायलों के बयानों के आधार पर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि विस्फोट से पहले क्या-क्या हुआ था।
एनआईए द्वारा आईडी एंगल की जांच से इस मामले में एक नया पहलू जुड़ गया है, हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि विस्फोटक उपकरण किस तरह का था, उसे कैसे विस्फोटित किया गया और इसके पीछे का मकसद क्या था।
फोरेंसिक विश्लेषण से यह पता लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है कि विस्फोट में किस सामग्री का इस्तेमाल हुआ था। साथ ही इससे जांचकर्ताओं को अलग-अलग सिद्धांतों के बीच फर्क करने में भी मदद मिलेगी। पुलिस को मिली जानकारियों की पुष्टि की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि विस्फोट एक दुर्घटना थी या जानबूझकर किया गया कोई कृत्य।
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