बेंगलुरु , जुलाई 08 -- कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग के बेंगलुरु के चुनिंदा ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी वार्डों में मतदाता सूचियों का अलग से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराने के फैसले के खिलाफ कर्नाटक उच्च न्यायालय में एक चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह कवायद एक ही मतदाताओं के लिए एक साथ दो मतदाता सूची पुनरीक्षणों की अभूतपूर्व स्थिति पैदा करती है। बेंगलुरु के चार मतदाताओं की इस रिट याचिका में राज्य चुनाव आयोग के 19 जून के उस आदेश को रद्द करने की मांग की गई है, जिसके तहत ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी के चुनींदा वार्डों के लिए एक स्वतंत्र एसआईआर का निर्देश दिया गया था। याचिका में अदालत से फैसला सुनाए जाने तक इस पूरी कवायद पर अंतरिम रोक लगाने का अनुरोध किया गया है।

याचिका के अनुसार, चुनाव आयोग ने देशव्यापी एसआईआर के तीसरे चरण के हिस्से के रूप में 16 जून को कर्नाटक की विधानसभा मतदाता सूचियों को पहले ही फ्रीज कर दिया था, जिसके तहत राज्यव्यापी सत्यापन चल रहा है और अंतिम मतदाता सूचियों का प्रकाशन 7 अक्टूबर को होना तय है। हालांकि, इसके ठीक तीन दिन बाद कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग ने कथित तौर पर 18 अप्रैल की एक अलग कट-ऑफ तारीख और एक अलग समय सारणी का उपयोग करते हुए ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी वार्डों के लिए एक समानांतर पुनरीक्षण का आदेश दे दिया, जिसका अंतिम प्रकाशन 31 जुलाई को होना है।

याचिका में तर्क दिया गया है कि इस दोहरी कवायद से मतदाताओं के लिए दो मतदाता सूचियां, अलग-अलग योग्यता, बूथ स्तर के अधिकारियों के दोहरे घर-घर सर्वेक्षण, दावे और आपत्तियां दर्ज होंगी जिससे मतदाताओं में भ्रम पैदा होगा और जन संसाधनों की बर्बादी होगी।

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