रांची , सितंबर 23 -- प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन टीएसपीसी (तृतीय प्रस्तुति सम्मेलन कमेटी) के सुप्रीमो बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता की वाराणसी में पुलिस मुठभेड़ में मौत के विरोध में संगठन ने 24 से 26 सितंबर तक झारखंड के सात जिलों में बंद का आह्वान किया है।

संगठन की ओर से जारी बताए जा रहे एक कथित बयान में मुठभेड़ को फर्जी करार देते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं।

जोनल कमांडर नथुनी के नाम से जारी बताए जा रहे बयान में कहा गया है कि लोहरदगा, लातेहार, महुआडांड़, गारूसीमा, गुमला और पलामू सीमांत जोनल कमेटी की ओर से बंद का आह्वान किया गया है। इसके तहत चतरा, हजारीबाग, पलामू, लातेहार, गढ़वा, लोहरदगा और गुमला जिले शामिल बताए गए हैं।

बयान में संगठन ने दावा किया है कि 10 सितंबर को बृजेश गंझू की रिजनल कमांडर शशिकांत और जोनल कमांडर नथुनी से बातचीत हुई थी। इसके बाद संगठन का आरोप है कि 16 सितंबर को पुलिस ने बृजेश को केरेडारी के जंगल से हिरासत में लिया और उसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। संगठन के मुताबिक, 20 सितंबर को वाराणसी में उसकी पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई।

हालांकि, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से सामने आए विवरण के अनुसार, 20 सितंबर को वाराणसी के रामनगर क्षेत्र में यूपी एटीएस और बृजेश गंझू के बीच मुठभेड़ हुई थी। पुलिस के मुताबिक, रोकने की कोशिश के दौरान बृजेश की ओर से फायरिंग की गई, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह घायल हुआ और अस्पताल में उसकी मौत हो गई। उस पर झारखंड सरकार और एनआईए की ओर से कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

संगठन ने मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए कार्रवाई की जांच की मांग से जुड़े सवाल उठाए हैं। बयान में पुलिस पर कानून अपने हाथ में लेने का आरोप लगाया गया है और हाईकोर्ट की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठन ने मुठभेड़ की न्यायिक जांच की मांग का संकेत दिया है।

संगठन के बंद के ऐलान के बाद संबंधित जिलों में कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन की तैयारियों पर नजर रहेगी। संगठन की ओर से लगाए गए हिरासत और फर्जी मुठभेड़ के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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