मुंबई , जुलाई 18 -- देश की पहली समुद्री रेल सुरंग की खुदाई का काम दूसरी टनल बोरिंग मशीन ने शनिवार को शुरू कर दिया।

यह सुरंग मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए महाराष्ट्र में ठाणे क्रीक में बनायी जी रही है। टीबीएम ने आज महाराष्ट्र में सावली (घंसोली) से विक्रोली की ओर खुदाई का काम शुरू किया। रेलवे के अनुसार 10 किलोमीटर के इस हिस्से में से सात किलोमीटर की सुरंग ठाणे क्रीक में समुद्र के नीचे होगी। यह किसी भी रेल गलियारे के लिए समुद्र के नीच बनी देश की पहली सुरंग होगी।

रेलवे ने बताया कि इस परियोजना के तहत कुल 21 किलोमीटर लंबे भूमिगत सुरंग में से मुंबई में सावली (घंसोली) और बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) के बीच 16 किलोमीटर का हिस्सा टनल बोरिंग मशीन का इस्तेमाल करके बनाया जाएगा।

गौरतलब है कि पहली टीबीएम ने गत पांच जुलाई को विक्रोली से बीकेसी की खुदाई शुरू की थी।

रेलवे के अनुसार यह टीबीएम भारत में रेल सुरंग निर्माण के लिए अब तक की सबसे बड़ी टीबीएम में से एक है। इसमें 13.6 मीटर व्यास का एक विशाल कटरहेड है, इसका वजन 3,200 टन और इसकी कुल लंबाई 96 मीटर है। इस मशीन में कटर व्हील/हेड, मेन बेयरिंग, जॉ क्रशर, इरेक्टर, मेन शील्ड, टेल शील्ड और चार खास गैंट्री जैसे उपकरण हैं, जो सुरंग बनाने के काम में मदद करते हैं।

यह मशीन मिक्सशील्ड टाइप की, सेमी-ऑटोमैटिक और स्लरी-बेस्ड टीबीएम है। मिक्सशील्ड तरीका खुदाई के दौरान सुरंग के सामने वाले हिस्से को सक्रिय रूप से स्थिर करने के लिए दबाव वाले लिक्विड बेंटोनाइट स्लरी सर्किट का इस्तेमाल करता है। यह मुश्किल और चुनौतीपूर्ण भू-वैज्ञानिक स्थितियों में काम करने के लिए एक बहुत भरोसेमंद तकनीक है।

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