पटना , जनवरी 13 -- राज्य में बुनियादी ढ़ांचे के विकास को गति देने और महत्वपूर्ण परियोजनाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप लागू करने के लिये मंगलवार को अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर की अध्यक्षता में वित्त विभाग और नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड लिमिटेड (एनआईआईएफएल) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया।
वित्त विभाग की ओर से विशेष सचिव मुकेश कुमार लाल और एनआईआईएफएल की ओर से कार्यकारी निदेशक प्रसाद गडकरी ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये। यह समझौता नौ दिसंबर, 2025 को मंत्रिपरिषद से प्राप्त स्वीकृति के आलोक में निष्पादित किया गया है।
इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य बिहार में निवेश योग्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की एक सशक्त पाइपलाइन तैयार करना है। भारत सरकार की ओर से प्रायोजित एनआईआईएफएल एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है, जो देश- विदेश के निवेशकों के लिये इंफ्रास्ट्रक्चर फंड का प्रबंधन करती है। बिहार में एनआईआईएफएल राज्य सरकार के लिये नॉलेज पार्टनर और तकनीकी सलाहकार की भूमिका निभायेगा और निजी निवेश आकर्षित करने के लिये रणनीतिक परामर्श उपलब्ध करायेगा।
एनआईआईएफएल स्वास्थ्य, शहरी बुनियादी ढाँचा (ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सीवरेज प्लांट), सड़क, ऊर्जा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, हवाई अड्डे और लॉजिस्टिक्स पार्क जैसे क्षेत्रों में ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड परियोजनाओं की पहचान करेगा। इसके साथ ही परियोजनाओं के लिये उपयुक्त राजस्व और कार्यान्वयन मॉडल तय करने, सड़क जैसे क्षेत्रों में मुद्रीकरण के अवसर तलाशने और सार्वजनिक- निजी भागीदारी से जुड़े विषयों पर अधिकारियों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास में सहयोग प्रदान करेगा।
एनआईआईएफएल, वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) और आईआईपीडीएफ जैसे मामलों में केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर तकनीकी सहायता भी उपलब्ध करायेगा। उल्लेखनीय है कि जनहित में इस परामर्श कार्य के लिये एनआईआईएफएल बिहार सरकार से कोई शुल्क या आर्थिक लाभ नहीं लेगा। यह समझौता प्रारंभिक रूप से एक वर्ष की अवधि के लिये प्रभावी रहेगा।
समझौते में यह भी स्पष्ट किया गया है कि एनआईआईएफएल की ओर से परामर्श दिये जाने के बावजूद, बाजार में लाई जाने वाली परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया में एनआईआईएफएल या उससे संबद्ध संस्थाओं को न तो किसी प्रकार का अधिमान्य लाभ मिलेगा और न ही भागीदारी से रोका जायेगा।
परियोजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिये वित्त विभाग एक 'एकल संपर्क बिंदु' नियुक्त करेगा, जो डेटा साझा करने और कार्यशालाओं के आयोजन में समन्वय स्थापित करेगा।
इस अवसर पर शिक्षा, ऊर्जा, नगर विकास एवं आवास तथा सिविल विमानन विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव सहित वित्त विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।
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