चंडीगढ़ , मई 07 -- हरियाणा में वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और कल्याण को लेकर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने अधिकारियों को बुजुर्गों से जुड़े मामलों में अधिक संवेदनशीलता बरतने के निर्देश दिये।

श्री रस्तोगी ने कहा कि 'माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007' केवल आर्थिक सहायता का कानून नहीं, बल्कि बुजुर्गों को सम्मान, सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने की सामाजिक जिम्मेदारी भी है।

सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अंत्योदय विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला में उपायुक्तों, एसडीएम, विधि विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। मुख्य सचिव ने कहा कि संयुक्त परिवार व्यवस्था कमजोर होने और एकल परिवारों के बढ़ने से कई बुजुर्ग अकेलेपन और उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

उन्होंने जिला प्रशासन को वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन मजबूत करने, वृद्धाश्रमों और वरिष्ठ नागरिक क्लबों की नियमित निगरानी करने तथा सभी सरकारी और गैर-सरकारी वृद्धाश्रमों का पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अतिरिक्त मुख्य सचिव जी. अनुपमा ने कहा कि सामाजिक न्याय को संवेदनशीलता के साथ लागू करना प्रशासनिक अधिकारियों की अहम जिम्मेदारी है।

कार्यशाला में अधिनियम और हरियाणा नियम, 2009 के विभिन्न प्रावधानों पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिक नाममात्र शुल्क देकर ट्रिब्यूनल में आवेदन कर सकते हैं। ट्रिब्यूनल प्रति माह 10 हजार रुपये तक भरण-पोषण भत्ता निर्धारित कर सकता है और आदेश का पालन न होने पर वसूली तथा कारावास की कार्रवाई भी संभव है।

समीक्षा बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025 के दौरान 177 वरिष्ठ नागरिकों को भरण-पोषण भत्ता स्वीकृत किया गया। साथ ही 1500 रुपये से कम मासिक आय वाले असहाय और परित्यक्त बुजुर्गों के मामलों में जिला प्रशासन को स्वतः संज्ञान लेने के निर्देश भी दिये गये।

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