नयी दिल्ली , फरवरी 13 -- 'सरकार यदि आबादी के हिसाब से बजट आवंटित करे तो बुंदेलखंड जैसे अंचलों का पिछड़ापन, बेरोजगारी और ग़रीबी दूर हो सकती है, लेकिन सरकार एक ओर बुलेट ट्रेन पर एक लाख करोड़ खर्च कर सकती है लेकिन बुंदेलखंड को उसकी जरूरत के मुताबिक रेल लाइन के लिए पांच हजार करोड़ भी नहीं देना चाहती। सही नीति से इसे ठीक किया जा सकता है।'समाजवादी नेता रघु ठाकुर ने शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बुंदेलखंड सर्वदलीय नागरिक संघर्ष मोर्चा के धरना में बोलते हुए यह बात कही।
इस धरने में शामिल होने व समर्थन देने के लिए बुंदेलखंड, छत्तीसगढ़ व विदर्भ से भी लोग आये थे। धरने के बाद प्रधानमंत्री, रेलमंत्री व वनमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया।
श्री ठाकुर की अगुवाई में साल 2009 से यह धरना हर साल जाड़ों में होता है। इस साल धरने के तहत भारतीय हॉकी के गौरव मेजर ध्यानचंद व सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक हरिसिंह गौर को भारतरत्न से अलंकृत करने, बुंदेलखंड को रेल सेवाओं से जोड़ने व अंचल में पर्यटन परिपथ विकसित करने की मांग मुख्य रूप से शामिल है। जिन मार्गों पर रेल सेवा शुरू करने की मांग की गई है उनमें भिंड- बांदा - महोबा, ललितपुर - सागर, सागर - छिंदवाड़ा, छतरपुर - सागर, झांसी - शिवपुरी और ललितपुर - चंदेरी मार्ग शामिल हैं।
धरना को समर्थन दे रहे आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केन्द्र सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि लगातार जनविरोधी और किसान-विरोधी फैसले लिए जा रहे हैं। हाल का भारत - अमेरिका व्यापार समझौता इसका ताजा प्रमाण है जिसमें अमेरिका तो भारतीय माल पर मनमाना आयात कर लगा रहा है लेकिन भारत में अमरीकी माल आने की पूरी छूट का इंतजाम कर दिया गया है। यह समझौता नहीं बल्कि किसानों के ' डेथ वारंट ' पर दस्तखत हैं जिसके चलते भारत के किसान बर्बाद होंगे और अमरीका के वे किसान मुनाफा कमायेंगे जिन्हें वहां की सरकार अच्छी खासी सब्सिडी देती है।
श्री सिंह ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार को 'भारतीय जुमला पार्टी ' बताते हुए कहा कि हर साल दो करोड़ नौकरी, फसल का दाम दोगुना करने, हर खाते में पंद्रह लाख रुपए आने जैसे वादे तो पूरे किए नहीं, उल्टे देशभर में एक लाख स्कूल बंद कर दिए गए, प्रति व्यक्ति आय घटती चली गई और देश तरक्की के मामले में 142 वें नंबर पर चला गया।
श्री ठाकुर ने कहा कि हर क्षेत्र को उसकी जनसंख्या के हिसाब से बजट मिलना चाहिए। आखिर ये जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा है।
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