हमीरपुर , मई 18 -- उत्तर प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड समेत प्रदेश के 28 जिलों में पहली बार "यूपी एग्रीज योजना" लागू करने का निर्णय लिया है। योजना के तहत सेटेलाइट सर्वे के माध्यम से कम उत्पादन वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां मिट्टी की सेहत सुधारने और कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में विशेष अभियान चलाया जाएगा। उप कृषि निदेशक डॉ. प्रमोद कुमार ने सोमवार को बताया कि प्रदेश में लगातार कृषि उत्पादन में गिरावट और मिट्टी की उर्वरक क्षमता में कमी चिंता का विषय बनती जा रही है। मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी और जल संकट के कारण कई क्षेत्रों में खेती प्रभावित हो रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए शासन ने सेटेलाइट तकनीक के जरिए ऐसे गांवों का चिन्हांकन कराया है, जहां फसल उत्पादन लगातार घट रहा है।
उन्होंने बताया कि हमीरपुर जिले के सुमेरपुर, मौदहा, गोहांड और सरीला ब्लॉक इस योजना के लिए चयनित किए गए हैं। फिलहाल इन चारों ब्लॉकों के 30-30 गांवों सहित कुल 120 गांवों को योजना में शामिल किया गया है, जहां वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से कृषि उत्पादन बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
डॉ. कुमार ने बताया कि चयनित क्षेत्रों में खरीफ सीजन के दौरान 1136 हेक्टेयर क्षेत्र में उड़द, 1480 हेक्टेयर में ज्वार तथा 3073 हेक्टेयर क्षेत्र में तिल की फसलों का प्रदर्शन किया जाएगा। इन फसलों में आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत बीज, जल संरक्षण और पोषक तत्व प्रबंधन का प्रयोग कर उत्पादन क्षमता बढ़ाने का प्रयास होगा। इसके बाद रबी फसलों के लिए भी अलग कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
उन्होंने कहा कि चयनित गांवों में खरीफ और रबी दोनों सीजन में उत्पादन लगातार कम हो रहा है, जिसे लेकर शासन ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। योजना के तहत मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने और टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जाएगा।
योजना के मंडलीय अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने बताया कि उन्हें हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन स्तर पर इसके लिए विस्तृत रणनीति तैयार की जा रही है तथा प्रत्येक जिले में पर्याप्त तकनीकी स्टाफ की तैनाती की जाएगी।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड जैसे जल संकट वाले क्षेत्रों में किसानों को कम पानी में होने वाली फसलों की ओर बढ़ना होगा, अन्यथा भविष्य में नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि जिले में जैविक और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें गोबर की खाद और जैविक उर्वरकों का उपयोग किया जा रहा है।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह योजना प्रदेश सरकार का एक अभिनव प्रयोग है, जिसके परिणामों का विश्लेषण कर भविष्य में इसे और व्यापक स्तर पर लागू करने पर विचार किया जाएगा।
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