जालौन , सितंबर 25 -- भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने शुक्रवार को केंद्र और प्रदेश सरकार को घेरते हुए बुंदेलखंड के लिए अलग विशेष पैकेज, प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को अतिरिक्त राहत तथा क्षेत्र के किसानों की कर्जमाफी की मांग उठाई।

उरई में राठ रोड स्थित गल्ला मंडी में श्री टिकैत की अध्यक्षता में एक विशाल किसान पंचायत का आयोजन किया गया जिसमे अतिवृष्टि से फसल और मकान क्षति, खाद-बीज, बिजली, अन्ना मवेशी समेत किसानों से जुड़े कई स्थानीय मुद्दों पर चर्चा हुई। इन मुद्दों में अतिवृष्टि से हुए नुकसान का मुआवजा, पर्याप्त खाद-बीज और निर्बाध बिजली की मांग पहले से ही भाकियू के प्रमुख मुद्दों में शामिल रही है।

श्री टिकैत ने कहा कि बुंदेलखंड लंबे समय से प्राकृतिक आपदाओं और कृषि संकट का सामना कर रहा है। उनके अनुसार किसानों को फसल और अन्य नुकसान का समुचित लाभ नहीं मिल पाने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है और क्षेत्र से पलायन की स्थिति बन रही है। उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार से बुंदेलखंड के लिए अलग पैकेज घोषित करने की मांग की, ताकि किसानों को राहत के साथ कृषि और रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जा सकें।

उन्होंने किसानों की आय दोगुनी करने के चुनावी दावे का जिक्र करते हुए कहा कि किसानों की आय दोगुनी नहीं हुई, जबकि किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ा है। टिकैत ने बुंदेलखंड के किसानों की कर्जमाफी की मांग उठाई। साथ ही उन्होंने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप सी2 50 प्रतिशत फार्मूले पर फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की मांग दोहराई।

किसान नेता ने बुंदेलखंड की खनिज संपदा से होने वाले लाभ में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग भी रखी। उनका कहना था कि क्षेत्र के खनिज संसाधनों से होने वाली आय और विकास कार्यों में स्थानीय लोगों की हिस्सेदारी होनी चाहिए। बिजली व्यवस्था के निजीकरण का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को सस्ती और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना जरूरी है।

किसान नेता ने बुंदेलखंड समेत पूरे देश में जमीनों के सर्किल रेट के पुनरीक्षण की मांग की। उन्होंने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापारिक समझौते को लेकर भी चिंता जताते हुए कहा कि सरकार को ऐसे किसी समझौते के कृषि क्षेत्र पर संभावित प्रभाव का आकलन करना चाहिए, जिससे किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

पंचायत के दौरान राकेश टिकैत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर भी आरोप लगाए। ज्ञानेश कुमार वर्तमान में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। टिकैत ने दावा किया कि देश में वोटों की चोरी हो रही है और चुनाव आयोग सरकार के इशारे पर काम कर रहा है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कथित तौर पर कुछ चुनाव परिणामों में गड़बड़ी का भी जिक्र किया।

उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर टिकैत ने कहा कि वह स्वयं चुनाव नहीं लड़ेंगे और भारतीय किसान यूनियन किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि जनता अपने स्तर पर स्वतंत्र निर्णय लेगी। युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने उन्हें आगे आने की अपील की।

श्री टिकैत ने 2020-21 के किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान उठाई गई कई मांगें अभी तक पूरी नहीं हुई हैं। उन्होंने किसानों के मुद्दों को लेकर आंदोलन जारी रखने और जरूरत पड़ने पर विभिन्न जिलों में आंदोलन करने की बात कही।

महापंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय महासचिव राजवीर सिंह जादौन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलराम लंबरदार, प्रदेश अध्यक्ष शर्मा, जिलाध्यक्ष डॉ. द्विजेंद्र निरंजन, जिला प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह गौर, कदौरा ब्लॉक मीडिया प्रभारी चंद्रशेखर सैनी और पूर्व जिलाध्यक्ष बृजेश राजपूत समेत संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे। पंचायत में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।

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