बिलासपुर , सितंबर 25 -- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में करीब 20 वर्षों से कथित रूप से पहचान छिपाकर रह रहे बंगलादेशी नागरिक अतीक हुसैन (42) को एसटीएफ और बिलासपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया है। पुलिस से आज सुबह मिली जानकारी के अनुसार अतीक वर्ष 2005 में अवैध तरीके से भारत आया था और यहां रहने के दौरान उसने भारतीय पहचान से जुड़े कई दस्तावेज भी बनवा लिए थे।
पुलिस ने गुरुवार तड़के करीब 5 बजे सरकंडा थाना क्षेत्र के सूर्या बिहार स्थित उसके किराए के मकान में दबिश देकर उसे पकड़ा। एसएसपी रजनेश सिंह के अनुसार अतीक को रायपुर के होल्डिंग सेंटर भेज दिया गया है और उसे बंगलादेशी डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पुलिस के मुताबिक अतीक के पास भारतीय पासपोर्ट, पैन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, जाति व निवास प्रमाण पत्र और 9वीं की मार्कशीट मिली है। उसने लिंगियाडीह के वोटर कार्ड से मतदान भी किया था। अतीक ने वर्ष 2018 में भारतीय पासपोर्ट बनवाया था। इसके बाद पैन कार्ड, आधार कार्ड, लिंगियाडीह से वोटर कार्ड तथा जाति और निवास प्रमाण पत्र भी बनवाए। उसके पास मंगला के एक निजी स्कूल की 9वीं की कथित फर्जी मार्कशीट भी मिली है।
पुलिस अब इन दस्तावेजों को तैयार कराने में उसकी मदद करने वाले लोगों का पता लगा रही है और दस्तावेज जारी होने की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार अतीक वर्ष 2007 में चेन्नई की कंपनी बीईसीओ लिफ्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के जरिए एनटीपीसी सीपत पहुंचा था। यहां उसने लिफ्ट मेंटेनेंस का काम शुरू किया और करीब 19 साल से इसी काम से जुड़ा रहा।
करीब 20 दिन पहले संदिग्ध लोगों की जांच के दौरान पुलिस ने अतीक को पकड़ने का प्रयास किया था, लेकिन वह फरार हो गया था। इसके बाद टीआई संजय शिंदे और जिला विशेष शाखा की टीम उसकी तलाश में जुटी थी। पुलिस ने आखिरकार सूर्या बिहार स्थित मकान की घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया।
पुलिस अतीक के संपर्कों और गतिविधियों की भी जांच कर रही है। विदेशी जासूस होने की आशंका के एंगल को भी जांच के दायरे में रखा गया है। बिलासपुर में रहने के दौरान वह किन लोगों के संपर्क में रहा और किससे बातचीत करता था, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। करीब 20 साल तक शहर में रहने और भारतीय पहचान से संबंधित कई दस्तावेज हासिल करने के बावजूद उसकी वास्तविक पहचान सामने नहीं आने को लेकर खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
पुलिस के अनुसार बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में अब तक 1162 लोगों की जांच की गई है। इनमें 23 लोगों को हिरासत में लेकर 4 सितंबर को रायपुर होल्डिंग सेंटर भेजा गया था। दस्तावेजों की जांच में 18 लोग भारतीय पाए गए, जिसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। शेष 5 संदिग्धों के दस्तावेजों की जांच अभी जारी है।
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