मुंबई , सितंबर 18 -- बीसीसीआई के सेक्रेटरी देवजीत सैकिया ने शुक्रवार को बताया कि बोर्ड ऑफ़ कंट्रोल फ़ॉर क्रिकेट इन इंडिया (बीसीसीआई) हर साल सरकार को इनकम टैक्स के तौर पर लगभग 3,000 करोड़ रुपये देता है।

सैकिया का यह बयान उस आम धारणा को गलत साबित करता है कि बीसीसीआई को टैक्स में छूट मिलती है। जहाँ दूसरे स्पोर्ट्स ऑर्गनाइज़ेशन को भारत सरकार से ग्रांट मिलती है, वहीं बीसीसीआई हर साल औसतन लगभग 3,000 करोड़ रुपये का टैक्स देता है। इसी आधार पर वह 'नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट' के तहत छूट की मांग कर रहा है। इस मुद्दे पर बहस चल रही है और हाल ही में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड से इस पर सफ़ाई मांगी थी।

हालांकि, सैकिया ने कहा कि बीसीसीआई इस एक्ट से बचने की कोशिश नहीं कर रहा है। बीसीसीआई सेक्रेटरी ने कहा, "स्पोर्ट्स एक्ट को लेकर हमारा रुख़ बिल्कुल साफ़ है।" "संबंधित अथॉरिटी को कई काम करने हैं। जब वे काम पूरे हो जाएंगे और बीसीसीआई स्पोर्ट्स एक्ट के दायरे में आ जाएगा, तो इसे एक 'डेज़िग्नेटेड स्पोर्ट' (मान्यता प्राप्त खेल) घोषित करने के लिए एक नोटिफ़िकेशन जारी करना होगा।

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