नयी दिल्ली , मई 2 -- वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने देश के में बीमा क्षेत्र में काम कर रही कंपनियां में स्वत: स्वीकृत मार्ग से शत प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की व्यवस्था लागू कर दी है।

सरकारी क्षेत्र की बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम में एफडीआई की अधिकतम सीमा 20 प्रतिशत रखी गई है।

वित्तीय सेवा विभाग की ओर से शनिवार को जारी अधिसूचना में चीन और हांगकांग से जुड़े निवेशकों के लिए भारतीय कंपनियों में निवेश के लिए शर्तें कड़ी रखी गई हैं।

इस फैसले के बाद विदेशी कंपनियां भारत में अपने पूर्ण नियंत्रण में बीमा और बीमा बिचौलिए (ब्रोकिंग) का कारोबार कर सकेंगी। शर्त यह है कि ऐसी कंपनियां भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के नियमों का पालन करती हों।

चीन और हांगकांग की केवल 10 प्रतिशत तक हिस्सेदारी वाली कंपनियों को भारत के बीमा क्षेत्र में स्वीकृत मार्ग से निवेश करने की अनुमति होगी। लेकिन उन कंपनियों के लाभ के असली हकदारों की कड़ाई से जांच की शर्त लगाई गई है।

अधिसूचना में कहा गया है कि चीन हांगकांग और भारत की सीमा से जुड़े अन्य देशों की कंपनियों के संबंध में निवेश नियमों में ढील नहीं होगी।

वह लिखनी है कि पिछले साल पारित " सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा विधि संशोधन) विधेयक- 2025 में बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को 75 फीसदी से बढ़कर शत प्रतिशत करने के प्रावधान किए गए हैं।

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