लुधियाना , अक्टूबर 31 -- गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, लुधियाना में पंजाब की स्वदेशी बीटल बकरी नस्ल के संरक्षण, आनुवंशिक सुधार और व्यावसायिक विकास को लेकर शनिवार को विचार-विमर्श सम्मेलन आयोजित किया गया।

'पंजाब में बीटल बकरी नस्ल सुधार का रोडमैप: संरक्षण से व्यावसायीकरण तक' विषय पर आयोजित सम्मेलन में वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और प्रगतिशील बकरी पालकों ने भाग लिया।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जे. पी. एस. गिल सम्मेलन के संरक्षक थे, जबकि विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. आर.एस. ग्रेवाल ने इसकी अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि इस पहल से अनुसंधान संस्थानों, सरकारी विभागों, किसानों और उद्योग जगत के बीच समन्वय मजबूत होगा। इससे बीटल नस्ल के संरक्षण, वैज्ञानिक प्रजनन और व्यावसायिक विकास के लिए साझा रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।

मखदूम स्थित केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के प्रमुख समन्वयक डॉ. एम. के. सिंह ने नस्ल विकास की दिशा में बकरी पालन क्षेत्र के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने नस्ल संरक्षण, वैज्ञानिक प्रजनन, उत्पादन क्षमता बढ़ाने, वीर्य संरक्षण और बकरी पालन को व्यावसायिक रूप देने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता बताई।

सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में बीटल नस्ल की विशेषताओं, मौजूदा स्थिति और चुनौतियों के अलावा आनुवंशिक सुधार, चयन मानदंड और वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन पर चर्चा की गई। इसके साथ ही बकरियों के वीर्य संरक्षण, एकीकृत बकरी पालन, रोगों की रोकथाम, जैव सुरक्षा, आर्थिक व्यवहार्यता, विपणन रणनीति और सरकारी नीतिगत सहयोग जैसे मुद्दे भी विचार-विमर्श का हिस्सा रहे।

डॉ ग्रेवाल ने कहा कि बीटल नस्ल का संरक्षण और आनुवंशिक सुधार पंजाब के पशुधन क्षेत्र को मजबूत बनाने तथा ग्रामीण आजीविका को टिकाऊ बनाने के लिए आवश्यक है। उन्होंने किसानोन्मुख तकनीकों के विकास, बाजार से बेहतर संपर्क और वैज्ञानिक बकरी पालन के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

सम्मेलन के समापन सत्र में विभिन्न हितधारकों ने अपने सुझाव रखे और नस्ल संरक्षण तथा बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए सिफारिशें तैयार की गईं। विश्वविद्यालय ने वैज्ञानिक बकरी पालन, स्वदेशी पशु आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन आधारित आजीविका को प्रोत्साहित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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