बीजापुर , मार्च 18 -- छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में आत्मसमर्पित नक्सलियों को शिक्षा के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित 'उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम' के अंतर्गत जिले के पुनर्वास केंद्र में साक्षरता अभियान के पांचवें बैच का शुभारंभ किया गया। इस बैच में कुल 35 असाक्षर आत्मसमर्पित व्यक्तियों को साक्षर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जिला जन संपर्क अधिकारी ने बुधवार को बताया कि जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे इस कार्यक्रम के तहत आत्मसमर्पित नक्सली पुनर्वास केंद्र में रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। अभियान का उद्देश्य उन्हें पढ़ना-लिखना सिखाने के साथ-साथ समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए तैयार करना है। प्रशासन का मानना है कि शिक्षा के माध्यम से इन लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है और उन्हें नए अवसरों से जोड़ा जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी लखनलाल धनेलिया सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। इस अवसर पर सभी शिक्षार्थियों को अध्ययन सामग्री के रूप में पुस्तक, कॉपी और पेन वितरित किए गए, ताकि वे नियमित रूप से अध्ययन कर सकें और साक्षरता अभियान का पूरा लाभ प्राप्त कर सकें।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि इस बैच के सभी शिक्षार्थी 22 मार्च को आयोजित होने वाली साक्षरता परीक्षा में शामिल होंगे। इसके लिए उन्हें नियमित अध्ययन और अभ्यास के लिए प्रेरित किया गया है।जिला परियोजना अधिकारी ने स्थानीय बोली गोंड़ी में शिक्षार्थियों से संवाद करते हुए उन्हें शिक्षा के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पढ़ना-लिखना सीखने से जीवन में नए अवसरों के द्वार खुलते हैं और व्यक्ति आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
जिला प्रशासन के अनुसार इस पहल का उद्देश्य आत्मसमर्पित नक्सलियों को शिक्षा, जागरूकता और सकारात्मक मार्गदर्शन के माध्यम से समाज के साथ जोड़ना है, ताकि वे एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकें।
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