भुवनेश्वर , मार्च 14 -- बीजू जनता दल (बीजद) ने प्रख्यात कवि मायाधर मानसिंह की जन्मस्थली 'नंदला' को राज्य की हाल ही में घोषित 'विरासत ग्राम' की सूची में शामिल न करने के लिए ओडिशा सरकार की कड़ी आलोचना की है।
भुवनेश्वर में जारी बयान में बीजद उपाध्यक्ष और पूर्व मंत्री संजय दास बर्मा ने कहा कि राज्य के संस्कृति विभाग ने 25 प्रतिष्ठित ओड़िया हस्तियों के पैतृक गांवों को 'विरासत ग्राम' घोषित किया था।
हालांकि पद्म श्री पुरस्कार विजेता मायाधर मानसिंह की जन्मस्थली नंदला को इस सूची से बाहर रखने पर गंभीर चिंता पैदा हो गयी हैं। श्री बर्मा ने मांग की है कि सरकार तुरंत अपने फैसले में सुधार करे और नंदला को इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल करे।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ब्रह्मगिरि विधानसभा क्षेत्र के कृष्णप्रसाद प्रखंड स्थित नंदला गांव को आधुनिक आधुनिक ओड़िया कविता के उद्गम स्थल के रूप में व्यापक रूप से पहचाना जाता है।
श्री मानसिंह ने अपनी साहित्यिक कृतियों, विशेष कर अपनी प्रसिद्ध रचना 'कोणार्क' के जरिये ओड़िया साहित्य में प्रेम, मानवतावाद और सौंदर्य का एक नया आयाम पेश किया है।
श्री बर्मा के अनुसार नंदला गांव कवि की शानदार साहित्यिक यात्रा का मूक गवाह है और इसे साहित्य प्रेमियों के लिए 'आधुनिक तीर्थ स्थल' कहा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि श्री मानसिंह ने 'धूप', 'साधब झिआ', 'हेमशस्य', 'पल्ली संध्या', 'महानदीरे ज्योत्स्ना विहार', 'दहन सुख', 'रूपदेवता', 'कोणार्क', 'उपेक्षिता', 'निक्वाण', 'शुभदृष्टि', 'जेमा', 'कमलायण', 'दूरे रहा' जैसी कई कालजयी काव्य कृतियों की रचना की।
कविता के अलावा उन्होंने 'ओड़िया साहित्य का पहला व्यापक इतिहास' भी लिखा, जो ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत में स्थायी योगदान है।
श्री बर्मा ने ऐसी प्रतिष्ठित साहित्यिक हस्ती के प्रति सरकार के कथित 'सौतेले व्यवहार' पर सवाल उठाते हुए यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार और उसके प्रतिनिधियों ने सांस्कृतिक रूप से समृद्ध ब्रह्मगिरि विधानसभा क्षेत्र की बार-बार उपेक्षा की है।
उन्होंने तथाकथित 'डबल इंजन सरकार' की भी आलोचना की और कहा कि एक तरफ वे 'ओड़िया अस्मिता' को बढ़ावा देने का दावा करते हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य के सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक दिग्गजों में से एक की जन्मस्थली की अनदेखी कर रहे हैं।
श्री बर्मा ने पार्टी रुख को दोहराते हुए कहा कि बीजद पुरजोर मांग करता है कि सरकार नंदला गांवव के अत्यधिक साहित्यिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए इसे तुरंत 'विरासत ग्राम' की सूची में शामिल करे।
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