दुर्ग , अक्टूबर 05 -- छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से करीब 250 टन लोहा स्क्रैप चोरी के मामले की जांच में आरोपियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) से पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। जांच में 1 जनवरी से 26 मई 2026 के बीच आरोपियों के बीच कुल 3959 बार बातचीत होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस सूत्रों से आज मिली जानकारी के अनुसार पुलिस अब कॉल के समय, टावर लोकेशन और घटनास्थल के नजरी नक्शे को आपस में जोड़कर पूरे नेटवर्क की कड़ियों की पड़ताल कर रही है।

जांच में सामने आए कॉल रिकॉर्ड के अनुसार संजय सिंह और अमित शर्मा के बीच सबसे अधिक 840 कॉल हुईं। इसके बाद अमित शर्मा और मिथेन के बीच 823, संजय सिंह और मिथेन के बीच 668 तथा घनश्याम और चितानंद के बीच 657 बार बातचीत दर्ज की गई है।

पुलिस जांच में इन नामों को उस नेटवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें ट्रकों की प्लांट में एंट्री, नंबर प्लेट बदलने, लोडिंग, वजन और स्क्रैप को संयंत्र परिसर से बाहर निकालने जैसी अलग-अलग भूमिकाओं की जांच चल रही है। आरोपियों के बीच लगातार संपर्क के रिकॉर्ड से पुलिस को नेटवर्क की विभिन्न कड़ियों को आपस में जोड़ने में मदद मिली है।

संजय सिंह के कथित कबूलनामे के मुताबिक मार्च से जून 2026 के बीच 30 से 40 ट्रिप में ट्रकों के जरिए बीएसपी प्लांट से लोहा स्क्रैप निकालकर अकलोरडीह, हथखोज के पास जमा किया गया और बाद में उसे बेचा गया। पुलिस ने इस कथित कबूलनामे को सीडीआर और घटनास्थल के नजरी नक्शे से जोड़कर अपनी जांच आगे बढ़ाई। मामले में अब तक पूर्व भाजपा नेता, उद्योगपति और बीएसपी कर्मचारी समेत 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

सीडीआर की पड़ताल में कॉल की संख्या के साथ उनके समय को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस के मुताबिक सुबह से दोपहर के बीच आरोपियों के बीच संपर्क अधिक रहा। जांच में इस अवधि को प्लांट के भीतर ट्रकों की एंट्री, वजन और लोडिंग जैसी गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं शाम और रात के समय भी बातचीत बढ़ने का पैटर्न सामने आया है।

पुलिस के अनुसार शाम और रात के दौरान स्क्रैप को प्लांट से बाहर निकालकर अकलोरडीह की ओर ले जाने तथा माल की डिलीवरी से जुड़ी गतिविधियां होती थीं। जांच में संभावना जताई जा रही है कि दिन के समय हुई बातचीत ऑपरेशन की तैयारी और प्लांट के अंदर की गतिविधियों से संबंधित हो सकती है, जबकि शाम और रात की कॉल ट्रकों की लोकेशन, माल पहुंचने और लेन-देन से जुड़ी हो सकती हैं।

जांच में संजय सिंह और अमित शर्मा के बीच मिले 840 कॉल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस इन दोनों को नेटवर्क की मुख्य कड़ी मानकर ट्रकों की आवाजाही और पूरी गतिविधि के समन्वय में उनकी भूमिका की पड़ताल कर रही है।

वहीं मिथेन और घनश्याम के संपर्क को लोडिंग और रूट से जोड़कर जांचा जा रहा है। पुलिस यह पता लगा रही है कि ट्रक कहां पहुंचते थे, माल किस तरह लोड किया जाता था और उसे किस रास्ते से प्लांट के बाहर निकाला जाता था।

मुदलियार, रुपेंद्र और रावेंद्र की भूमिका को पुलिस स्क्रैप की खपत और बिक्री से जोड़कर जांच रही है। प्लांट से निकलने के बाद माल किन लोगों तक पहुंचा और उसका भुगतान किस तरीके से किया गया, इसकी भी पड़ताल जारी है। इसी कड़ी में पुलिस ने रसमड़ा की फैक्टरी से विनोद गर्ग समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने 21 जून को तहरीर और 22 जून को घटनास्थल का नजरी नक्शा तैयार किया था।

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