मुंबई , जनवरी 21 -- बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के महापौर पद के आरक्षण के लिए 22 जनवरी को आयोजित होने वाली लॉटरी से पहले राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गयी है।

नगर विकास विभाग की ओर से आयोजित होने वाले इस लॉटरी को लेकर इसलिए भी सरगर्मी बढ़ गयी है, क्योंकि यह उम्मीद लगायी जा रही है कि इस बार महापौर का पद अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित हो सकता है, जो राजनीतिक समीकरण को काफी प्रभावित कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो बहुमत वाले सत्तारूढ़ दल के लिए परेशानियां बढ़ सकती हैं।

बीएमसी में कुल 227 पार्षदों का सदन है, जिसमें महापौर चुनने के लिए 114 के बहुमत की आवश्यकता होती है। हालिया चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि उसकी सहयोगी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पास 29 सीटें हैं। साथ मिलकर महायुति के पास 118 पार्षद हैं, जो बहुमत के आंकड़े से अधिक है। यदि राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद अलग से चुनाव लड़ने वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के तीन पार्षदों को भी जोड़ लिया जाए, तो महायुति को 121 पार्षदों का समर्थन प्राप्त है।

वहीं, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) 65 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और वह कांग्रेस, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे), समाजवादी पार्टी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के विभाजित विपक्षी गुट का नेतृत्व कर रही है। सामूहिक रूप से इन दलों के पास 106 पार्षद हैं, जो साधारण बहुमत से आठ कम हैं।

गौरतलब है कि बीएमसी के साथ-साथ 29 नगर निगमों में महापौर पद के आरक्षण के लिए लॉटरी के द्वारा तय किया जाना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल संख्या बल ही महापौर पद का परिणाम तय नहीं करेगा, बल्कि आरक्षण की श्रेणी इसमें निर्णायक भूमिका निभाएगी।

यदि बीएमसी महापौर का पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित होता है, तो महायुति को अपनी बढ़त गंवानी पड़ सकती है, क्योंकि उसके पास एसटी-आरक्षित वार्डों से कोई निर्वाचित पार्षद नहीं है। इसके विपरीत उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने शहर के दोनों एसटी-आरक्षित वार्डों (53 और 121) में जीत दर्ज की है, जो उसे स्पष्ट बढ़त दे सकता है। वार्ड 53 और वार्ड 121 दोनों में शिवसेना (यूबीटी) के उम्मीदवारों ने शिवसेना के उम्मीदवारों को हराया।

शिवसेना (यूबीटी) के सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि वार्ड स्तर के परिणामों और उनके निर्वाचित पार्षदों की जातिगत पात्रता के आधार पर, अनुसूचित जाति (एससी) आरक्षण भी उनकी पार्टी के पक्ष में होगा।

अधिकारियों ने हालांकि स्पष्ट किया कि बीएमसी के नियम एक सत्तारूढ़ राजनीतिक दल को महापौर पद के लिए सामान्य श्रेणी के पार्षद को नामांकित करने की अनुमति देते हैं, भले ही आरक्षण उनके पक्ष में न हो, बशर्ते कि नामांकित व्यक्ति के पास आरक्षण श्रेणी से मेल खाने वाला वैध जाति प्रमाण पत्र हो।

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