मुंबई , जुलाई 17 -- बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने महानगर में एक ओर जहां लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए देसी प्रजाति के पेड़ों को लगाने का फैसला लिया है, वहीं दूसरी ओर वह उन पेड़ों को हटाएगा, जो खतरनाक और भारी बारिश तथा तेज हवा का सामना नहीं कर पाते।

पिछले कुछ सालों में मुंबई में भारी बारिश और तेज हवाओं के दौरान पेड़ गिरने की कई घटनाएं हुई हैं, जिनसे अक्सर गाड़ियों और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा है और लोगों की जान को भी बड़ा खतरा पैदा हुआ है। नगर निगम के विशेषज्ञों के अनुसार तेज तूफान में आसानी से उखड़ जाने वाले कई पेड़ सजावटी प्रजातियों के होते हैं। मुंबई की आम मिट्टी और तटीय जलवायु में इन पेड़ों की जड़ें गहरी और मजबूत नहीं बन पातीं, जिससे वे तेज हवाओं के सामने बहुत कमजोर हो जाते हैं।

भारत के देसी पेड़ों की जड़ें गहरी और मजबूत होने के कारण वे तटीय मिट्टी में भी मजबूती से जमी रहती हैं, जिससे उनके उखड़ने का खतरा काफी कम हो जाता है। जबकि देसी पेड़ों में मौसम का सामना करने की क्षमता, लगातार मानसून की भारी बारिश और समुद्र की तेज हवाओं में भी जीवित रहने के लिए प्राकृतिक रूप से अनुकूलित होते हैं। दूसरी ओर देसी प्रजातियों के पेड़ स्थानीय शहरी जैव विविधता को सहारा देते हैं और देसी पक्षियों, कीड़ों और छोटे शहरी वन्यजीवों को प्राकृतिक आवास प्रदान करते हैं।

नगर निगम प्रशासन ने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अपने उद्यान विभाग को तेजी से जांच करने और आठ दिनों के भीतर एक विस्तृत कार्य योजना सौंपने का निर्देश दिया है।

पेड़ों को हटाने और दोबारा लगाने का यह अभियान शुरू में सड़क किनारे की व्यस्त जगहों, अधिक ट्रैफिक वाले रास्तों और उन इलाकों पर केंद्रित होगा जहां अक्सर पेड़ गिरने की घटनाएं होती रही हैं। अस्थिर सजावटी पेड़ों को मजबूत देसी प्रजातियों से व्यवस्थित रूप से बदलकर बीएमसी का लक्ष्य मुंबई के लिए एक सुरक्षित, हरा-भरा और अधिक मजबूत शहरी वन क्षेत्र तैयार करना है।

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