वाराणसी , अगस्त 23 -- दर्शकों की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया और मांग को देखते हुए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के थिएटर सेल 'रंगशाला' ने परफॉर्मिंग आर्ट्स फैकल्टी और कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, फ्रेस्नो (अमेरिका) के सहयोग से पंडित ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में म्यूजिकल नाटक 'सत्य हरिश्चंद्र' का पुनर्मंचन किया गया है।

नाटक का निर्देशन कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, फ्रेस्नो में कम्युनिकेशन के प्रोफेसर और सातवीं पीढ़ी के 'सांगीत' कलाकार प्रो. देवेंद्र शर्मा ने शनिवार को किया।

कार्यक्रम की शुरुआत देवी सरस्वती, पंडित ओंकारनाथ ठाकुर और महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई। मुख्य अतिथि डीन ऑफ स्टूडेंट्स प्रो. रंजन कुमार सिंह और विशिष्ट अतिथि आर्ट्स फैकल्टी की डीन प्रो. सुषमा घिल्डियाल थीं।

रंगशाला के समन्वयक प्रो. संजय कुमार ने कहा कि सांगीत, स्वांग और नौटंकी जैसी लोक नाट्य शैलियां संगीत, कविता, अभिनय और नृत्य का अनूठा संगम हैं। रंगशाला का उद्देश्य युवा पीढ़ी को इस समृद्ध नाट्य परंपरा से जोड़ना और इसे नए रूप में आगे बढ़ाना है।

प्रो. सिंह ने 'सत्य हरिश्चंद्र' की समकालीन प्रासंगिकता बताते हुए ईमानदारी, नैतिक साहस, त्याग और विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहने जैसे मूल्यों को रेखांकित किया। प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने भारतीय सांस्कृतिक एवं नाट्य विरासत को संरक्षित करने के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

संगीत, अभिनय, संवाद और पारंपरिक सांगीत शैली के समन्वय से तैयार प्रस्तुति में नौटंकी की पारंपरिक विशेषताओं को बरकरार रखते हुए इसे आधुनिक मंचीय रूप दिया गया। नाटक में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया, जिससे इसमें 'लघु भारत' की झलक देखने को मिली। असम, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और पुडुचेरी समेत विभिन्न राज्यों के विद्यार्थियों ने अभिनय किया।

हरिश्चंद्र की प्रमुख भूमिका तरुण सिंह भदौरिया और प्रियांशु शुक्ला ने, विश्वामित्र की भूमिका सिफारिश और धीरज सेन ने तथा तारावती की भूमिका रितुल और अम्रपाली शर्मा ने निभाई। रितिका सिंह ने तारावती के साथ विष्णु की भूमिका भी निभाई।

संगीत पक्ष में नगाड़े पर जगदीश, हारमोनियम पर कृपा सिंधु और ढोलक पर गुरुदयाल ने संगत की। लाइव वाद्य-संगत ने प्रस्तुति के भाव और नाटकीय प्रभाव को और प्रभावी बनाया। कार्यक्रम के अंत में अंग्रेजी विभाग के डॉ. राहुल चतुर्वेदी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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