वाराणसी , मार्च 10 -- काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के महिला महाविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में "शक्ति से समृद्धि तक के पथगमन में महिलाओं की भूमिका: विकसित भारत 2047" विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

मंगलवार को इस संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों, विशेषज्ञों तथा विद्यार्थियों ने भाग लेकर विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में महिलाओं के नेतृत्व एवं योगदान पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने शैक्षणिक एवं सामाजिक जीवन में संवाद, सहभागिता तथा प्रभावी संप्रेषण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि विनम्रता, स्पष्टता तथा विचारपूर्ण शब्दों के साथ प्रस्तुत किए गए विचार प्रायः आक्रामक अभिव्यक्ति की अपेक्षा अधिक प्रभावी सिद्ध होते हैं। प्रो. चतुर्वेदी ने रेखांकित किया कि संस्थानों तथा समाज में परिवर्तन सभी हितधारकों के सामूहिक व्यवहार, कार्यों तथा परस्पर संवाद के माध्यम से ही संभव है।

उद्घाटन सत्र के दौरान प्रो. कुमकुम धर (निदेशक, बिरजू महाराज कथक संस्थान, लखनऊ), डॉ. लता सिंह (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली), वीना जाडे (उपाध्यक्ष, थॉमसन रॉयटर्स, बेंगलुरु), प्रो. मधुलिका अग्रवाल (पूर्व संकाय प्रमुख, विज्ञान संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय), प्रो. सुषमा घिल्डियाल (संकाय प्रमुख, कला संकाय), स्वाति सिंह (निदेशक, "मुहिम एक सार्थक प्रयास") तथा महिला महाविद्यालय की पूर्व छात्रा श्रुति ओला प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं। इनके अतिरिक्त अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति भी रही।

वक्ताओं ने भारत के सामाजिक, आर्थिक तथा बौद्धिक विकास में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को साकार करने के लिए शिक्षा, शोध, उद्यमिता, शासन तथा सांस्कृतिक क्षेत्रों में महिलाओं की व्यापक भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम का समापन डॉ. रीता जायसवाल द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

संगोष्ठी के दूसरे दिन शैक्षणिक सत्रों के साथ विद्यार्थियों तथा शोधार्थियों द्वारा शोध-पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। विद्यार्थियों के लिए एक चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा, जिसके परिणाम कार्यक्रम के दौरान घोषित किए जाएंगे। संगोष्ठी का समापन विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को साकार करने में महिलाओं की भूमिका पर विमर्श के साथ होगा।

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