वाराणसी , मई 19 -- काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सामाजिक विज्ञान संकाय के इतिहास विभाग की स्नातकोत्तर चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा तेज हो गई है। प्रश्न-पत्र में "ब्राह्मणवादी पितृसत्ता" और प्राचीन भारत में महिलाओं की स्थिति से जुड़ा सवाल पूछे जाने पर विभिन्न स्तरों पर बहस छिड़ गई है। परीक्षा में पूछा गया प्रश्न था, "ब्राह्मणवादी पितृसत्ता से आप क्या समझते हैं? चर्चा कीजिए कि किस प्रकार ब्राह्मणवादी पितृसत्ता ने प्राचीन भारत में महिलाओं की प्रगति में बाधा डाली?"तीन घंटे की इस परीक्षा के प्रश्न-पत्र में तीन अलग-अलग खंड बनाए गए थे, जिनमें लघु उत्तरीय, दीर्घ उत्तरीय और वैकल्पिक प्रश्न शामिल थे। संबंधित प्रश्न वैकल्पिक श्रेणी में पूछा गया था।

विश्वविद्यालय परिसर में इस प्रश्न को लेकर छात्रों और शिक्षकों के बीच चर्चाएं हो रही हैं, हालांकि कोई भी खुलकर प्रतिक्रिया देने से बच रहा है। शैक्षणिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम और इतिहास के अकादमिक विमर्श का हिस्सा है, इसलिए इसे केवल शैक्षणिक दृष्टिकोण से ही देखा जाना चाहिए।

प्रश्न-पत्र में नारीवाद और पितृसत्ता से जुड़े अन्य प्रश्न भी शामिल थे। इनमें गेरडा लर्नर की पुस्तक "द क्रिएशन ऑफ पितृसत्ता" के प्रमुख तर्क, नारीवाद की परिभाषा और नारीवाद की तीन लहरों पर संक्षिप्त टिप्पणी जैसे विषय पूछे गए थे।

सबसे अधिक चर्चा "ब्राह्मणवादी पितृसत्ता" संबंधी प्रश्न को लेकर ही हो रही है। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क कार्यालय से इस विषय में प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई आधिकारिक बयान नहीं मिल सका। वहीं इतिहास विभाग और अन्य संकायों के कई शिक्षक भी इस मुद्दे पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचते नजर आए।

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