रांची , मई 19 -- झारखंड के बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मेसरा (बीआईटी मेसरा) और भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के नॉर्थ ईस्टर्न स्पेस एप्लीकेशन्स सेंटर (एनईएसएसी) ने बीआईटी मेसरा, रांची में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों, जिओ एआई अनुसंधान, रिमोट सेंसिंग और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को औपचारिक रूप देने के लिए एक एमओयू साईन किया है।
बीआईटी मेसरा परिसर में डॉ. एस.पी. अग्रवाल (डायरेक्टर, एनईएसएसी), प्रो. इंद्रनील मन्ना (वाईस चांसलर, बीआईटी मेसरा), डॉ. सी. जगन्नाथन (फैकल्टी ऑफ रिमोट सेंसिंग एंड जियोइन्फॉर्मेटिक्स; फॉर्मर डीन ऑफ रीसर्च इनोवेशन एंड एक्सटेंशन और वर्तमान में सरला बिरला युनिवर्सिटी के वाईस चांसलर), संस्थान के विभिन्न डीन, प्रो. ए.पी. कृष्णा (हैड, डिपार्टमेन्ट ऑफ रिमोट सेंसिंग और जियोइन्फॉर्मेटिक्स), डॉ. राजेश जैन (रजिस्ट्रार), बीआईटी मेसरा के वित्त अधिकारी, शोधकर्ताओं औरएनईएसएसी के वैज्ञानिकों की उपस्थिति में इस एमओयू पर साईन किए गए।
प्रोग्राम की शुरूआत डॉ आनंद प्रसाद सिन्हा, एसोसिएट डीन ऑफ रीसर्च, इनोवेशन एंड एक्सटेंशन द्वारा सम्बोधन के साथ हुई, इसके बाद प्रोफेसर एपी कृष्णा, हैड, डिपार्टमेन्ट ऑफ रिमोट सेंसिंग और जियोइन्फॉर्मेटिक्स ने स्वागत सम्बोधन दिया। उन्होंने उभरती भूस्थानिक तकनीकों में आपसी सहयोग के साथ अनुसंधान के महत्व पर ज़ोर दिया।
ऑफिस ऑफ डीआरआईई की ओर से बात करते हुए डॉ प्रवीण श्रीवास्तव ने बहु-आयामी अनुसंधान एवं इनोवेशन को बढा़वा देने के लिए संस्थागत साझेदारियों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। इसके बाद डॉ राजेश जैन ने सभा को सम्बोधित करते हुए साझेदारी के प्रयोजन एवं विज़न पर रोशनी डाली।
औपचारिक हस्ताक्षर से पहले वाईस चांसलर प्रोफेसर इंद्रानिल मन्ना ने डॉ एस.पी. अग्रवाल को सम्मानित किया। एमओयू पर साईन प्रोफेसर इंद्रानिल मन्ना, वाईस चांसलर, बीआईटी मेसरा और डॉ एसपी अग्रवाल, डायरेक्टर, एनईएसएसीद्वारा किए गए।
इसके बाद, एनईएसएसी के वैज्ञानिक/इंजीनियर-एसई, श्री निलय निशांत ने एमओयू के उद्देश्यों, परिचालन प्रावधानों और सहयोग के ढांचे पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने इस समझौते के उद्देश्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र के छात्रों के लिए शैक्षणिक पहुंच में सुधार करना, तथा भूस्थानिक अनुप्रयोगों और अनुसंधान के क्षेत्र में बीआईटी मेसरा औरएनईएसएसी की पूरक क्षमताओं का उपयोग करना शामिल है।
आज साईन किए गए एमओयू में इंटर्नशिप, अनुसंधान का आदान-प्रदान, पाठ्यक्रम में उभरते भूस्थानिक विषयों को शामिल करना, गेस्ट फैकल्टी की भागीदारी, अनुसंधान परियोजनाएं और उच्च शिक्षा के अवसरों के प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा, इस समझौते के तहतएनईएसएसी के वैज्ञानिक बीआईटी मेसरा के रीसर्च स्कॉलर्स का संयुक्त सुपरविज़न भी करेंगे।
इस समझौते के तहत,एनईएसएसी संयुक्त अनुसंधान गतिविधियों में सहायता के लिए भू-स्थानिक डेटाबेस, सैटेलाईट इमेजरी, मौसम संबंधी डेटासेट और धरती के अवलोकन तथा जीआईएस ऐप्लीकेशन्स छम्ै।ब् में तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेगा।
वहीं बीआईटी मेसरा- संयुक्त नेशनल-इंटरनेशनल रीसर्च, आउटरीच गतिविधियों, प्रशिक्षण प्रोग्रामों तथा इंजीनियरिंग एवं रिमोट सेंसिंग डोमेन में क्षमता निर्माण में योगदान देगी।
इस समझौते के तहत भूस्थानिक विषय, रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, स्पेस टेक्नोलॉजी, बहु-आयामी भूस्थानिक ऐप्लीकेशन्स को मास्टर्स एवं पीएचडी प्रोग्रामों में विस्तारित किया जाएगा।
इस साझेदारी के तहत खासतौर पर धरती के प्रेक्षण के चित्रयों एवं उभरती भूस्थानिक तकनीकों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए संयुक्त सेमिनार, कार्यशालाएं एवं प्रशिक्षण प्रोग्राम भी आयोजित किए जाएंगे।
बीआईटी मेसरा, एनईएसएसी के वैज्ञानिकों को गेस्ट फैकल्टी के रूप में अपने साथ जोड़ेगी। ये वैज्ञानिक और रीसर्च स्कॉॅलर बीआईटी मेसरा में पार्ट-टाईम मास्टर्स और डॉक्टोरल प्रोग्राम भी कर सकते हैं, जो संस्थान के नियमों और अनुमोदनों के अधीर होगा।
इस अवसर पर सभा को सम्बोधित करते हुए एनईएसएसी के डायरेक्टर डॉ एसपी अग्रवाल ने बीआईटी मेसरा औरएनईएसएसी के बीच के लम्बे संबंधों पर रोशनी डाली और कहा कि दोनों संस्थानों की संयुक्त क्षमताएं रीसर्च, तकनीकी विकास और सामाजिक ऐप्लीकेशन्स में कारगर होंगी।
'"इस सहयोग में शोध के परिणामों को प्रभावी बनाने और गुणवत्तापूर्ण प्रकाशनों की अपार संभावनाएँ हैं। दोनों संस्थानों के वैज्ञानिकों, फैकल्टी सदस्यों और छात्रों के बीच अकादमिक जुड़ाव जिओ ए आई रीसर्च के क्षेत्र में ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है," प्रो. इंद्रानिल मन्ना ने कहा।
प्रोग्राम का समापन डॉ एसएस सोलकी, डीन पीजी स्टडीज़ द्वारा समापन सम्बोधन के साथ हुआ जिसके बाद श्री निलय निशांत ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।
यह समझौता ज्ञापन पांच वर्षों के लिए प्रभावी है, जिसमें विस्तार का प्रावधान भी है। समझौते के तहत जिओएआई रीसर्च, रिमोट सेंसिंग, भूस्थानिक विशलेषण और राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप बहु-आयामी अनुसंधान को शामिल किया गया है।
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