रांची , मई 13 -- झारखंड के बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा, रांची ने संयुक्त राज्य अमेरिका के सार्वजनिक अनुसंधान विश्वविद्यालय, एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
दोनों संस्थानों के बीच यह गठबंधन शैक्षणिक सहयोग, संकाय सहभागिता, छात्र विकास और संयुक्त पहलों के अवसरों को बढ़ावा देगा। यह समझौता ज्ञापन संकाय विकास एवं विनिमय, छात्र सहभागिता पहलों, शैक्षणिक कार्यशालाओं, संगोष्ठियों और सम्मेलनों में दोनों संस्थानों के बीच सहयोग के लिए एक रूपरेखा स्थापित करेगा।
इसके साथ ही यह साझा शिक्षण पद्धतियों, पाठ्यक्रम निर्माण दृष्टिकोणों और बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा एवं एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी के छात्रों और संकाय सदस्यों के बीच व्यापक शैक्षणिक संवाद को भी प्रोत्साहित करेगा। इस दौरान हुई चर्चाओं में दोनों संस्थानों द्वारा शैक्षणिक सहयोग, इंजीनियरिंग शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव और भविष्य के संस्थागत सहयोग के अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
इस समझौते पर बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना और एलुमनाई एवं इंटरनेशनल रिलेशंस की डीन डॉ. श्रद्धा शिवानी की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी की ओर से फुल्टन स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग में प्रेसिडेंट्स प्रोफेसर, स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एंड ऑगमेंटेड इंटेलिजेंस की वाइस डीन (एकेडमिक एवं स्टूडेंट अफेयर्स) तथा एएसयू-मायो सेंटर फॉर इनोवेटिव इमेजिंग की निदेशक डॉ. टेरेसा वू; एकेडमिक एवं स्टूडेंट अफेयर्स के वरिष्ठ निदेशक जेरेमी हेल्म; दक्षिण-पूर्व एशिया के एसोसिएट वाइस प्रोवोस्ट, सहायक डीन एवं ग्लोबल आउटरीच एंड एक्सटेंडेड एजुकेशन के कार्यकारी निदेशक जेफरी गॉस; स्नातकोत्तर कार्यक्रमों के एसोसिएट डीन, मैकेनिकल एवं एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के प्रोफेसर तथा एएसयू एनर्जी एफिशिएंसी सेंटर के निदेशक डॉ. पैट्रिक फेलन; तथा इरा ए. फुल्टन स्कूल्स ऑफ इंजीनियरिंग के डीन एवं प्रोफेसर काइल स्क्वायर्स भी उपस्थित रहे।
संस्थान के कुलपति प्रो. इंद्रनील मन्ना ने कहा, "यह सहयोग भारतीय उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के दृष्टिकोण की एक रणनीतिक पहल है। बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान, मेसरा की तकनीकी दक्षता को एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी के वैश्विक नवाचार के साथ जोड़कर हम एक बहु-विषयक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहे हैं, जो शिक्षा और रोजगार के बीच के ऐतिहासिक अंतर को कम करता है। हम अपने छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का पाठ्यक्रम एवं अनुसंधान अनुभव प्रदान कर रहे हैं, जो भारत की वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनने की महत्वाकांक्षा के अनुरूप है।" यह समझौता दोनों संस्थानों के बीच निरंतर संवाद के लिए एक औपचारिक आधार तैयार करेगा तथा भविष्य में सहयोगात्मक शैक्षणिक एवं अनुसंधान पहलों को लेकर आगे की चर्चाओं को प्रोत्साहित करेगा।
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