, March 25 -- 'बिहार वन' के माध्यम से किसान अपने खेत में रहते हुए भी किसी भी योजना के लिए आवेदन कर सकता है। इसके साथ ही छात्र-छात्राएं बिना किसी देरी के प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं। कोई भी परिवार सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकता है। बिहार कॉमन सोशल रजिस्ट्री के साथ एकीकरण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि नागरिकों को बार-बार एक ही जानकारी देने की आवश्यकता न पड़े।
बिहार-वन के तहत नागरिकों को स्थानीय भाषा में चैटबोट भी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे नागरिकों को सुविधा प्राप्त करने में आसानी होगी।
बिहार सरकार और सीपीआईएल ने मिलकर इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया है। इंडिया एआई समिट में हुए समझौते के बाद जिस गति से काम शुरू हुआ, वह इस बात का प्रमाण है कि यह पहल केवल योजना तक सीमित नहीं, बल्कि उसे जमीन पर उतारने की प्रतिबद्धता भी रखती है। पटना में आधुनिक डेवलपमेंट सेंटर की स्थापना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो शहर को तकनीक और नवाचार के केंद्र के रूप में विकसित कर रहा है।
'बिहार वन' केवल प्रशासनिक सुधार का माध्यम ही नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास का भी एक सशक्त साधन बन रहा है। इस परियोजना के विस्तार के साथ सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
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