, Sept. 19 -- यह पहल विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए बेहतर एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने, विद्यालयों में पढ़ाई की निरंतरता बनाए रखने तथा परीक्षा एवं अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए आधुनिक और बहुउद्देशीय आधारभूत संरचना उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।पटना में स्थापित बापू परीक्षा परिसर बिहार में बड़े पैमाने पर परीक्षाओं के आयोजन के लिए विकसित आधुनिक परीक्षा आधारभूत संरचना का एक प्रमुख उदाहरण है। कुम्हरार स्थित इस परीक्षा परिसर का उद्घाटन वर्ष 2023 में किया गया था। पांच मंजिला इस परिसर को एक साथ बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों की परीक्षा आयोजित करने की क्षमता के साथ विकसित किया गया है।
बापू परीक्षा परिसर में एक साथ 16,600 से अधिक परीक्षार्थियों के लिए परीक्षा व्यवस्था की क्षमता है, जबकि लगभग 3,500 अभ्यर्थियों के लिए ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की जा सकती है। परिसर में परीक्षा संचालन के लिए बड़े परीक्षा हॉल के साथ सीसीटीवी आधारित निगरानी, नियंत्रण एवं सुरक्षा व्यवस्था जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
बापू परीक्षा परिसर की तर्ज पर अब जिला स्तर पर प्रस्तावित 29 हाईटेक परीक्षा भवन-सह-वज्रगृह विकसित किए जा रहे हैं। इन भवनों में एक साथ लगभग 4,000 परीक्षार्थियों के परीक्षा देने की सुविधा के साथ उत्तरपुस्तिकाओं के सुरक्षित भंडारण, मूल्यांकन केंद्र, 24x7 सीसीटीवी निगरानी, अग्नि सुरक्षा तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध होंगी। इससे राज्य के विभिन्न जिलों में परीक्षा आयोजन के लिए आधुनिक एवं समर्पित आधारभूत संरचना का विस्तार होगा।
इन 29 स्थानों पर बनने वाले वज्रगृह में परीक्षाओं के लिए आवश्यक गोपनीय सामग्री का सुरक्षित भंडारण किया जा सकेगा। आवश्यकता के अनुसार निर्वाचन कार्यों से संबंधित संवेदनशील सामग्री का भंडारण भी यहां किया जा सकेगा।
इसका सीधा लाभ शिक्षण संस्थानों को मिलेगा। निर्वाचन जैसे कार्यों के दौरान विद्यालयों एवं अन्य शिक्षण संस्थानों का उपयोग कम होने से वहां पठन-पाठन को लगातार जारी रखने में मदद मिलेगी और विद्यार्थियों की पढ़ाई में होने वाला व्यवधान कम किया जा सकेगा।
इन हाईटेक बहुउद्देशीय भवनों में फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरण एवं आपदा प्रबंधन से संबंधित व्यवस्थाएं रहेंगी। साथ ही 24x7 सीसीटीवी के माध्यम से निगरानी एवं रिकॉर्डिंग की व्यवस्था उपलब्ध होगी।
जिस विद्यालय या महाविद्यालय में परीक्षा भवन-सह-वज्रगृह का निर्माण किया जाएगा, उसे संचालन के लिए भवन सौंपा जाएगा। संबंधित विद्यालय/महाविद्यालय अपनी आवश्यकता के अनुसार इन भवनों में विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियां एवं आंतरिक परीक्षाएं आयोजित कर सकेंगे।
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