, March 13 -- पिछले सात वर्षों में राज्य भर में किए गए सघन पौधरोपण की वजह से आज हरित क्षेत्र का दायरा भी तेजी से बढ़ा है। यह 15.5 फीसदी तक पहुंच चुका है। सरकार की मंशा के अनुसार वर्ष 2028 तक हरित आवरण 17 फीसदी तक करने का लक्ष्य है।

विभागीय पदाधिकारियों का कहना है कि राज्य में पौधरोपण अभियान चलाने से ग्रामीण आजीविका की रीढ़ भी मजबूत हुई है। फलदार पौधे लगाने से फल के माध्यम से जहां किसानों की आर्थिक आमदनी बढ़ी है वहीं स्वयं सहायता समूहों और जीविका दीदियों के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार का नया विकल्प तैयार हुआ है।

नर्सरियों में हवादार और फलदार पौधे तैयार कर समूह की सदस्य और जीविका दीदी सालाना लाखों की कमाई कर रही हैं। साथ ही सड़क, नहर, सार्वजनिक स्थल, विद्यालय परिसर, सरकारी कार्यालय और ग्राम पंचायत क्षेत्रों में सघन पौधरोपण से हरित क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है।

बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि विश्व स्तर पर जलवायु परिवर्तन की समस्या एक ज्वलंत मुद्दा है। इससे बचने के लिए पौधरोपण बहुत ही आवश्यक है। उन्होंने कहा किजल-जीवन-हरियाली अभियान सरकार की एक गंभीर और महत्वाकांक्षी योजना है। इसके सहारे पर्यावरण संरक्षण और जलवायु संतुलन की दिशा में क्रांतिकारी प्रयास किए गए हैं। पौधरोपण से राज्य के हरित क्षेत्र का तेजी से विस्तार हुआ है। इसके साथ ही लाखों जीविका दीदियों के लिए रोजगार की एक नई राह बनी है।

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