, June 18 -- स्वागत भाषण में आयोजन समिति के चंद्र भूषण ने भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रसिद्ध कथन "जो पुस्तकों के आगे झुकते हैं, उन्हें किसी के आगे झुकने की आवश्यकता नहीं पड़ती" का उल्लेख करते हुए कहा कि पुस्तकें व्यक्ति को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाती हैं। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक मेला यात्रा दो अप्रैल को झारखंड के हजारीबाग से शुरू हुई थी और विभिन्न शहरों से होते हुए अब दरभंगा पहुंची है। इसके बाद मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर में भी इसका आयोजन होगा।मेले में देश के प्रतिष्ठित प्रकाशकों की हजारों पुस्तकें प्रदर्शित की गई हैं। साहित्य, इतिहास, संस्कृति, विज्ञान, धर्म, बाल साहित्य, प्रेरक साहित्य तथा प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पुस्तकों का विशाल संग्रह पाठकों को आकर्षित कर रहा है। स्थानीय लेखकों को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष 'लेखक कोना' भी बनाया गया है, जहां उनकी पुस्तकों का प्रदर्शन और बिक्री की व्यवस्था की गई है।
आयोजकों के अनुसार 19 जून को चित्रकला, गायन, कहानी-वाचन, कविता पाठ और नृत्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इच्छुक प्रतिभागी स्थल पर पंजीकरण कर कार्यक्रम में भाग ले सकेंगे।
वहीं 20 जून को आयोजित होने वाला भव्य कवि सम्मेलन पुस्तक मेले का प्रमुख आकर्षण होगा। इसमें अंतरराष्ट्रीय कवयित्री अंकिता सिन्हा तथा उत्तर प्रदेश के चर्चित कवि गोविंद गजब सहित कई प्रतिष्ठित कवि अपनी रचनाओं का पाठ करेंगे।
चार दिनों तक चलने वाला यह पुस्तक मेला न केवल दरभंगा बल्कि पूरे मिथिलांचल के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक जीवन को नई ऊर्जा प्रदान करेगा, बल्कि नई पीढ़ी को पुस्तकों और ज्ञान की दुनिया से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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