, May 15 -- सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनुरंजन ने कहा कि 21वीं सदी को पर्यावरणीय चिंता के दौर के रूप में भी याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अवसाद से प्रभावित कुछ लोग भविष्य को लेकर निराशा की स्थिति में रहते हैं तथा नशीले पदार्थों की ओर आकर्षित होने लगते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे महानगरों में बढ़ते प्रदूषण के कारण लोग अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं।

वक्ताओं ने कहा कि ईको एंजायटी एक सीमा तक लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करती है, लेकिन इसकी अधिकता मानसिक समस्या का रूप ले सकती है। इससे बचाव के लिए लोगों को आशावादी दृष्टिकोण अपनाने तथा व्यक्तिगत स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के प्रयास करने चाहिए।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत एवं मंच संचालन डॉ रश्मि शिखा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा ने किया। सेमिनार को रिसर्च स्कॉलर सुरभि कुमारी, अभिषेक, संजय कामत, नंदन कुमार एवं समद आजम ने भी संबोधित किया।

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