, July 30 -- सावन महीने में सोमवार के दिन को लेकर हिंदू धर्म में मान्यता है कि इस दिन पूजा पाठ एवं व्रत करने से भगवान शिव अपने भक्तों पर प्रसन्न होते हैं। महिलाओं को सोमवारी व्रत करने से मनोवांछित वर की प्राप्ति होती है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए सोमवारी व्रत किया था। पौराणिक कथा के अनुसार, सावन में समुद्र मंथन हुआ था। सृष्टि की रक्षा के लिये मंथन से निकले विष को भगवान भोलेनाथ पी गए थे. इस वजह से उनका कंठ नीला पड़ गया था। इसी कारण उनका नाम नीलकंठ पड़ा। समस्त देवी-देवताओं ने शिव जी को राहत पहुंचाने और विष के प्रभाव को कम करने के लिए भगवान शिव पर शीतल जल अर्पित किया,तभी से महादेव शिव को जल बहुत प्रिय हैं।सावन में भोलेभंडारी का जलाभिषेक करने से वे प्रसन्न होते हैं।

भगवान भोलेनाथ की अर्धांगिनी देवी सती ने शिव जी को हर जन्म में पति के रूप में पाने के लिए तपस्या की थी। माता सती का दूसरा जन्म पार्वती के रूप में हुआ था। देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए सावन के माह में कठोर तप किया था। कहते हैं कि शिव जी ने इसी माह में देवी पार्वती से विवाह किया था। इसलिए भगवान भोलेनाथ को सावन का माह बहुत प्रिय हैं।

शिवभक्त अपने घरों में भगवान शिव का गंगजल और दूध के साथ अभिषेक कर रहे हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि के साथ शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। इसके अलवा आरा के बुढ़वा महादेव मंदिर, बेगूसराय के बाबा हरिगिरि धाम, बक्सर के प्रसिद्ध ब्रह्मपुर धाम, सोनपुर के बाबा हरिहरनाथ मंदिर, मोतिहारी में अरेराज स्थित सोमेश्वरनाथ महादेव, मधेपुरा के सिंहेश्वर बाबा का मंदिर, मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ मंदिर में भी आज से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।

देश के विभिन्न हिस्सों से गेरुआ वस्त्र धारी कांवरियों के सुल्तान गंज पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है। इस दौरान यहां का वातावरण बोल बम और हर हर महादेव के जयघोष से गूंजने लगा है। सुल्तान गंज मे देश- विदेश से आने वाले कांवरियों का जत्था उत्तर वाहनी गंगा का पवित्र जल पात्र मे भरते हैं और यहां से करीब एक सौ पांच किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए झारखंड में देवघर में स्थापित बाबा बैधनाथ धाम के शिवलिंग पर चढ़ाते हैं।

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