, Aug. 31 -- बैठक में सहकारी समितियों के कर्मचारियों से संबंधित विषयों पर भी महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए। कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा तथा नियमित वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्था किए जाने, कर्मचारियों के लिए न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने तथा वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन में अनावश्यक विलंब अथवा उल्लंघन की स्थिति में आर्थिक दायित्व निर्धारित करने संबंधी प्रावधानों में आवश्यक संशोधन पर चर्चा की गई। साथ ही, समितियों के लाभ से एक विशेष तकनीकी विकास कोष के गठन तथा कमजोर सहकारी समितियों के पुनरुद्धार के लिए विशेष सहकारी संरचना/समिति के गठन की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।बैठक में सहकारी समितियों के शीघ्र भंग होने से संबंधित वर्तमान प्रावधानों की भी समीक्षा की आवश्यकता व्यक्त की गई। प्रतिनिधियों द्वारा सुझाव दिया गया कि आधे से अधिक सदस्यों के त्यागपत्र देने की स्थिति में समिति के भंग होने संबंधी प्रावधान को आवश्यकतानुसार शिथिल किया जाए, जिससे कार्यशील एवं उपयोगी सहकारी समितियों का निरंतर संचालन सुनिश्चित किया जा सके। सहकारी समितियों, विशेषकर पैक्स के ससमय अंकेक्षण एवं निर्वाचन को सुनिश्चित करने तथा वैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन की स्थिति में प्रभावी दंडात्मक एवं आर्थिक प्रावधान किए जाने की आवश्यकता पर भी विचार किया गया।

सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने उपस्थित प्रतिनिधियों से प्राप्त सुझावों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बिहार राज्य सहकारी नीति 2026 का उद्देश्य सहकारिता आंदोलन को अधिक मजबूत, लोकतांत्रिक, पारदर्शी, स्वायत्त एवं व्यावसायिक बनाना है। उन्होंने कहा कि नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिनियम, नियमावली एवं उपविधियों में जहां आवश्यक होगा, वहां नियमसंगत संशोधन किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं की जमीनी आवश्यकताओं एवं प्रतिनिधियों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे सहकारी समितियां अपने सदस्यों के हित में अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित