, Aug. 31 -- मंत्री ने विशेष रूप से पैक्सों में व्यवसाय विविधीकरण एवं आय के नए स्रोत विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पैक्सों को केवल पारंपरिक गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय विभिन्न आर्थिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता है। स्थानीय संसाधनों, कृषि उत्पादों एवं बाजार की संभावनाओं के अनुरूप नए उद्यमों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जिससे पैक्स की आय में वृद्धि के साथ-साथ किसानों को भी उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य एवं विभिन्न सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकें।इस क्रम में मंत्री द्वारा विभिन्न पैक्सों एवं सहकारी संस्थाओं द्वारा किए जा रहे नवाचारी प्रयोगों एवं उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की गई। विशेष रूप से कैमूर जिले के दादर पैक्स द्वारा दादर नीर एवं सरसों तेल जैसे उत्पादों के निर्माण एवं विपणन की पहल को सराहनीय बताया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचारी प्रयास अन्य पैक्सों के लिए भी प्रेरणादायक हैं और सहकारी संस्थाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मंत्री ने कहा कि सहकारी समितियों के माध्यम से रोजगार, उद्यमिता एवं स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि पैक्स एवं अन्य सहकारी संस्थाओं को उनकी स्थानीय आवश्यकताओं एवं क्षमताओं के अनुरूप नए उद्यमों से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। इससे सहकारिता का लाभ सीधे किसानों एवं ग्रामीण समुदाय तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

बैठक में बिहार स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष रमेश चन्द्र चौबे, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक नालन्दा के अध्यक्ष जितेन्द्र कुमार, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक पटना के अध्यक्ष रितेश कुमार, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक गयाजी के अध्यक्ष विनय कुमार, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक आरा के अध्यक्ष सत्येन्द्र सिंह, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक सिवान के अध्यक्ष मनोज सिंह, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक मुजफ्फरपुर के अध्यक्ष अमर नाथ पाण्डेय, हरित सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन संघ, पटना के अध्यक्ष मनोज कुमार तथा सोनापुर पैक्स एवं दादर पैक्स के अध्यक्ष सहित अन्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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