, Sept. 23 -- यह मेला कई मायने में खास है। यहां हुनर और उद्यमिता को प्रोत्साहन तो मिल ही रहा है, साथ ही यहां आने वाले हजारों आगंतुक अपने सैकड़ों वर्ष पुराने शिल्प, कलाकृतियों, संस्कृति, परंपरा और देशी व्यंजनों से भी रू-ब-रू हो रहे हैं।सरस मेला को लेकर लोगों में उत्साह लगातार बढ़ रहा है। मेले के तीसरे दिन मंगलवार को 25 लाख 37 हजार रुपये से अधिक के उत्पादों एवं व्यंजनों की बिक्री हुई है। इसके साथ ही सरस मेला में तीन दिनों में कुल 68 लाख 56 हजार रुपये से अधिक का व्यवसाय हो चुका है। बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन आ रहे हैं और मेले का लुत्फ उठा रहे हैं।

मेले में केवल उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री ही नहीं हो रही, बल्कि उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और बिक्री को बेहतर करने पर सुझावों का भी आदान-प्रदान हो रहा है। इसके लिए प्रतिदिन क्रेता-विक्रेता (बायर-सेलर मीट) संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

इसी क्रम में बुधवार को भी सरस ज्ञान भवन के मेला परिसर सभागार में जीविका और अर्न्स्ट एंड यंग संस्था के संयुक्त तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण बायर-सेलर मीट संवाद सत्र आयोजित हुआ। इस सत्र में बिहार के पारंपरिक उत्पादों यथा- भूंजा, सत्तू, आटा, मखाना, मेज, मक्का, चायपत्ती, प्रोटीन बार और हस्तशिल्प की गुणवत्ता बढ़ाने, उत्पाद के उचित दर का निर्धारण, ब्रांडिंग, बाजार और विपणन पर गहन चर्चा हुई।

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