, Sept. 22 -- इस संवाद कार्यक्रम में बतौर विशेषज्ञ श्रीमती माधवी चौधरी, जिला परियोजना प्रबंधक, जीविका और श्री आलोक कुमार गोपाल, परियोजना प्रबंधक, जीविका ने अपनी विशेषज्ञता साझा की। उन्होंने उत्पादों की गुणवत्ता को और बेहतर करने, आकर्षक ब्रांडिंग, मानकीकरण और आधुनिक बाजार की मांग के अनुसार उत्पादों को तैयार करने के गुर सिखाए। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि पैकेजिंग अच्छी हो, गुणवत्ता एक समान हो और ब्रांड की कहानी जुड़ी हो तो ग्रामीण उत्पाद बड़े-बड़े मॉल और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी अपनी जगह बना सकते हैं।मेले में भाग ले रही जीविका दीदियों में सरस मेला के आयोजन को लेकर काफी उत्साह है। उन्होंने बताया कि सरस मेला ने उन्हें अपनी पहचान दी है। पहले उनके उत्पाद गांव तक ही सीमित थे, लेकिन अब उन्हें शहरों एवं बाज़ारों में हजारों ग्राहकों से जुड़ने का मौका मिल रहा है और बड़े क्रेताओं से सीधा संपर्क हो रहा है, जिससे उनकी आमदनी बढ़ रही है । मेला में सुसज्जित सभी स्टॉल पर डिजिटल खरीददारी की व्यवस्था है और रुपये की जमा निकासी के लिए ग्राहक सेवा केंद्र भी संचालित हैं lउल्लेखनीय है कि बिहार सरस मेला 29 सितंबर तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात्रि 8 बजे तक आम जनता के लिए संचालित किया जा रहा है। ग्रामीण महिला उद्यमियों के हुनर को प्रोत्साहित करते हुए बिहार सरस मेला उनकी आत्मनिर्भरता की गाथा भी प्रस्तुत कर रहा है।
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