पटना , फरवरी 11 -- बिहार सरकार ने बुधवार को राज्य विधानसभा में स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए राज्य नोडल खाता (एसएनए) गठित नहीं किया जा सका, जिसके कारण योजना से संबंधित धनराशि लंबित रह गई।
विधानसभा में विधायक मंजीत कुमार सिंह के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि योजना के लिए धन की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने राज्य नोडल खाता गठित करने का निर्देश दिया था, लेकिन खाता नहीं बनने के कारण संबंधित धनराशि लंबित रह गई।
मंत्री ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री से 31 जनवरी तक राज्य सरकार को धनराशि उपयोग की अनुमति देने का अनुरोध किया था, जिसे केंद्र ने स्वीकार कर लिया।
मंत्री ने कहा कि चूंकि अब तक राज्य नोडल खाता गठित नहीं हो पाया है, इसलिए उन्होंने दोबारा केंद्र सरकार से 31 मार्च तक धनराशि उपयोग की अनुमति देने का अनुरोध किया है, जिससे लंबित परियोजनाओं के क्रियांवयन और उनको पूरा करने में तेजी लाई जा सके।
श्री सिंह ने इसके बाद पूरक प्रश्न के माध्यम से कहा कि मंत्री ने अपने उत्तर में स्वीकार किया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कुल 12,84,15 (12 लाख 08 हजार 415) आवास स्वीकृत किए गए, जिनमें से 9,23,361 (09 लाख 23 हजार 361) आवास निर्माणाधीन हैं और इनके भुगतान लंबित हैं। उन्हने सरकार से सदन को यह जानकारी देने की मांग की कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इन आवासों के लिए कितनी राशि का भुगतान लंबित है।
विधायक श्री सिंह ने इससे पहले, एक स्थानीय दैनिक अखबार का हवाला देते हुए कहा कि पीएम आवास योजना की राशि का भुगतान रुकने से गरीबों के लगभग नौ लाख आवासों का निर्माण ठप हो गया है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 7 लाख आवासों को स्वीकृति दी गई थी और 2025-26 में अप्रैल तक पांच लाख आवासों को स्वीकृति मिली। इनमें से नौ लाख से अधिक आवासों का निर्माण अब भी लंबित है। उन्होंने कहा कि इस अवधि में 12.20 लाख आवासों के लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 2.85 लाख आवास ही पूरे हो सके हैं। उन्होंने सरकार से लक्ष्य प्राप्त करने के लिए उठाए गए कदमों का खुलासा करने की मांग की।
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