, Oct. 10 -- मुख्यमंत्री ने कहा कि सरस्वती विद्या निकेतन के रूप में 700 मॉडल स्कूलों की व्यवस्था विकसित की गई है, जिसमें करीब 3.5 लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। इन विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुविधा के लिए 'विद्यार्थी साथी ऐप' शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से रात में भी ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा है। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी रात में पढ़ना पसंद करते हैं। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सरकार मॉडल स्कूलों में डिजिटल माध्यम से पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध करा रही है। रात एक बजे तक पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगभग 1.42 लाख है, जबकि शनिवार और रविवार के दिनों में यह संख्या करीब पौने दो लाख तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि विद्यार्थियों में पढ़ने की ललक है। सरकार इस उत्साह को बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन के माध्यम से आगे बढ़ाएगी। उन्होंने केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी से भी शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने में सहयोग का आग्रह किया।श्री चौधरी ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए टीआरई०-4 के माध्यम से लगभग 33 हजार नए शिक्षकों की बहाली की जा रही है। उन्होंने कहा कि परीक्षा और चयन प्रक्रिया के माध्यम से योग्य शिक्षकों का चयन कर उन्हें सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का अवसर दिया जाएगा। उन्होंने शिक्षा मंत्री से कहा कि स्कूलों और कॉलेजों के ऐसे 100 उत्कृष्ट शिक्षकों की पहचान की जाए, जो अपने-अपने विषयों में बेहतर शिक्षण क्षमता रखते हों। चयनित शिक्षकों को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय सहित दुनिया के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों और अन्य देशों में प्रशिक्षण के लिए भेजने की दिशा में काम किया जाए, जिससे वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शिक्षण पद्धतियों और शैक्षणिक गुणवत्ता से परिचित होकर बिहार लौटें और यहां के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा दे सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पी०एम० श्री विद्यालयों की व्यवस्था को भी बेहतर बना रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि अगले साल मार्च तक सभी पी०एम० श्री विद्यालयों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का अवसर दिया जाएगा। उन्होंने शिक्षा मंत्री से कहा कि स्कूलों और कॉलेजों के ऐसे 100 उत्कृष्ट शिक्षकों की पहचान की जाए, जो अपने-अपने विषयों में बेहतर शिक्षण क्षमता रखते हों। चयनित शिक्षकों को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय सहित दुनिया के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों और अन्य देशों में प्रशिक्षण के लिए भेजने की दिशा में काम किया जाए,जिससे वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शिक्षण पद्धतियों और शैक्षणिक गुणवत्ता से परिचित होकर बिहार लौटें और यहां के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा दे सकें।
श्री चौधरी ने कहा कि सरकार पीएम श्री विद्यालयों की व्यवस्था को भी बेहतर बना रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि अगले साल मार्च तक सभी पीएम श्री विद्यालयों को व्यवस्थित करने और उनकी शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार के लाखों विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं लेकिन सरकार चाहती है कि बिहार में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की ऐसी व्यवस्था विकसित हो, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर पढ़ाई के लिए बाहर जाने की आवश्यकता न हो। उन्होंने बताया कि बिहार में डिग्री कॉलेजों की संख्या बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। जुलाई 2026 में 211 स्थानों पर नए डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई की व्यवस्था की गई, जिससे उच्च शिक्षा की पहुंच अधिक क्षेत्रों तक हो सके। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल में शिक्षकों से मुलाकात के दौरान कई लोगों ने बताया कि वे दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में पढ़ाते थे। अब उन्हें अपनी मिट्टी की सेवा करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षकों का बिहार लौटना राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि बिहार के विद्यार्थियों को अपने राज्य में ही योग्य शिक्षक, बेहतर कॉलेज और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो, जिससे वे यहीं रहकर अपनी प्रतिभा को निखार सकें और राज्य के विकास में योगदान दे सकें।
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